तस्वीर में पूर्व विधायक पानाचन्द मेघवाल पारंपरिक साफा पहने नजर आ रहे हैं।

बारां-अटरू विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक पानाचन्द मेघवाल ने बारां-अकलेरा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-90 पर प्रस्तावित टोल प्लाजा का स्थान जिला मुख्यालय से 60 किलोमीटर से अधिक दूर निर्धारित करने की मांग की है। उन्होंने स्थानीय जनता पर टोल के अतिरिक्त आर्थिक बोझ को रोकने के लिए केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखा है। पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को भी दी गई है।

पानाचन्द मेघवाल ने पत्र में बारां जिला मुख्यालय को शून्य बिंदु मानते हुए अकलेरा की ओर सड़क मार्ग से 60 किलोमीटर से अधिक दूरी पर टोल प्लाजा स्थापित करने की व्यवहार्यता का परीक्षण कराने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि बारां और अकलेरा के बीच टोल प्लाजा स्थापित करने की योजना विचाराधीन होने की जानकारी मिली है।

मेघवाल के अनुसार, यह मार्ग ग्रामीण और शहरी नागरिकों के लिए जिला मुख्यालय, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, कृषि उपज मंडियों, न्यायालयों और सरकारी कार्यालयों तक पहुंचने का महत्वपूर्ण साधन है। इसलिए टोल का स्थान निर्धारित करने से पहले स्थानीय आवागमन और लोगों की आर्थिक स्थिति का समुचित अध्ययन किया जाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा, “किसानों, विद्यार्थियों, मरीजों, श्रमिकों और छोटे व्यापारियों को अपनी आवश्यक दैनिक यात्रा के लिए बार-बार टोल चुकाना पड़े, ऐसी स्थिति से बचाया जाना चाहिए। राष्ट्रीय राजमार्ग का विकास क्षेत्र की प्रगति के साथ आमजन की यात्रा को सुलभ और किफायती बनाने वाला होना चाहिए।”

पूर्व विधायक ने पत्र में बारां-झालावाड़ मेगा हाईवे पर लड़ानियां गांव के निकट स्थापित टोल की व्यवस्था का उल्लेख भी किया है। उन्होंने इस व्यवस्था का अभिलेखीय परीक्षण कराने और स्थानीय आवागमन को मिलने वाली सुविधा को प्रस्तावित टोल के स्थान चयन में ध्यान में रखने का अनुरोध किया।

मेघवाल ने प्रस्तावित टोल का स्थान, संबंधित गांव, सड़क की किलोमीटर स्थिति, परियोजना की लंबाई, कार्यकारी संस्था और स्वीकृति की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने निकटवर्ती टोल प्लाजाओं तथा नगरपालिका या नगर सीमा से दूरी के संबंध में लागू नियमों का पालन सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया।

पत्र में पात्र स्थानीय वाहन मालिकों के लिए रियायती मासिक पास की सरल व्यवस्था, किसानों और दैनिक यात्रियों के लिए अतिरिक्त राहत तथा आवश्यकता के अनुसार सुरक्षित सर्विस रोड अथवा वैकल्पिक संपर्क मार्ग उपलब्ध कराने की मांग की गई है। उन्होंने शुल्क संग्रह शुरू करने से पहले सड़क पर अपेक्षित कार्यों, सुरक्षा सुविधाओं, संकेतकों, जल निकासी और सुरक्षित चौराहों की स्थिति की जांच कराने का आग्रह भी किया।

पानाचन्द मेघवाल ने जिला प्रशासन, प्रभावित ग्राम पंचायतों, जनप्रतिनिधियों, किसान संगठनों, व्यापारियों और परिवहन प्रतिनिधियों से परामर्श के बाद निर्णय लेने पर जोर दिया। उन्होंने अभ्यावेदन पर निर्णय होने तक प्रस्तावित टोल स्थापना अथवा शुल्क संग्रह की कार्रवाई स्थगित रखने और निर्णय की लिखित जानकारी देने का अनुरोध किया है।

साथ ही, मेघवाल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से संबंधित जिला प्रशासन और विभाग से तथ्यात्मक रिपोर्ट प्राप्त कर स्थानीय जनता के हित में केन्द्र सरकार को अनुशंसा भेजने का आग्रह किया है। प्रस्तावित टोल के स्थान, स्थानीय आवागमन और शुल्क व्यवस्था को लेकर उनकी मांग अब केन्द्र और राज्य स्तर पर विचार के लिए रखी गई है।

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