तस्वीर में अन्ता विधायक प्रमोद जैन भाया एक कार्यक्रम के दौरान माइक पर बात करते हुए नजर आ रहे हैं।

बारां। रबी फसल 2026-2027 की बुवाई से पहले बारां जिले में डीएपी और यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता का मुद्दा उठाते हुए अन्ता विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रमोद जैन भाया ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखा है। भाया ने किसानों को समय पर पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने के साथ खाद के साथ जबरन अतिरिक्त उत्पाद ‘अटैचमेंट’ के रूप में बेचने पर तत्काल रोक लगाने और शिकायतों की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

भाया ने कहा कि बारां जिले के अधिकांश परिवारों की आजीविका खेती पर निर्भर है। अन्नपूर्णा जिले के रूप में पहचान रखने वाले बारां में बुवाई के समय किसानों को पर्याप्त खाद उपलब्ध कराना सरकार का दायित्व है। खाद की कमी और वितरण में परेशानी से किसानों की खेती प्रभावित होती है और उन पर आर्थिक बोझ बढ़ता है।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष रबी सीजन में भी किसानों को खाद के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ी थी। नवंबर 2025 में उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस समस्या से अवगत कराया था। इसके बाद दिसंबर में कांग्रेस पार्टी ने किसानों के साथ चम्बल फर्टिलाइजर्स फैक्ट्री, गढ़ेपान और जिला कलेक्ट्रेट, बारां के बाहर धरना देकर खाद की आपूर्ति बढ़ाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद आपूर्ति में कुछ सुधार हुआ था।

भाया ने कहा कि अन्ता विधानसभा उपचुनाव के दौरान मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक मंच से बारां जिले की मांगों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया था, लेकिन खाद के आवंटन और आपूर्ति में जिले के साथ भेदभाव का प्रश्न अब भी बना हुआ है। उन्होंने अपने तारांकित विधानसभा प्रश्न संख्या 280 के उत्तर का हवाला देते हुए बताया कि बारां से भेजी गई डीएपी की मांग 33,000 मीट्रिक टन से घटाकर 22,700 मीट्रिक टन कर दी गई थी।

उन्होंने बताया कि अप्रैल से जून की तिमाही में 17,000 मीट्रिक टन की मांग के विरुद्ध केवल 5,422 मीट्रिक टन खाद की आपूर्ति हुई, जो लगभग 32 प्रतिशत है। भाया ने सरकार से इन आंकड़ों की समीक्षा कर जिले की वास्तविक कृषि आवश्यकता के अनुसार खाद का आवंटन और आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की।

खाद के साथ अतिरिक्त उत्पाद खरीदने की मजबूरी को लेकर भाया ने कहा कि खाद कंपनियों द्वारा डीलरों को खाद के साथ अतिरिक्त उत्पाद दिए जाने और फिर किसानों को भी इन्हें खरीदने के लिए बाध्य करने की शिकायतें गंभीर हैं। किसानों को आवश्यक डीएपी या यूरिया प्राप्त करने के लिए अपनी इच्छा और आवश्यकता के विरुद्ध अन्य उत्पाद खरीदने पड़ें, यह सीधा आर्थिक शोषण है। उन्होंने सरकार से खाद कंपनियों को स्पष्ट निर्देश देने की मांग की कि खाद की बिक्री को किसी अतिरिक्त उत्पाद की खरीद से नहीं जोड़ा जाए।

भाया ने मुख्यमंत्री से संबंधित विभाग और अधिकारियों को बारां जिले की वास्तविक खाद मांग का पुनर्मूल्यांकन करने, रबी की बुवाई से पहले पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने और वितरण की नियमित निगरानी के निर्देश देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर, निर्धारित मूल्य पर और बिना किसी अतिरिक्त उत्पाद की अनिवार्य खरीद के खाद मिलनी चाहिए।

डीएपी और यूरिया की उपलब्धता तथा जबरन ‘अटैचमेंट’ दिए जाने के संबंध में 30 सितम्बर को प्रकाशित समाचार पत्रों की प्रतियां भी भाया ने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र के साथ संलग्न की हैं।

भाया ने चेतावनी दी कि समय रहते पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं कराई गई और किसानों को फिर परेशानी उठानी पड़ी तो कांग्रेस पार्टी किसान हितों में धरना-प्रदर्शन करेगी। आवश्यकता पड़ने पर चम्बल फर्टिलाइजर्स फैक्ट्री, गढ़ेपान के समक्ष भी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने सरकार से तत्काल प्रभावी कदम उठाकर किसानों को राहत देने की मांग की है।

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