शाहबाद जंगल बचाने की मुहिम तेज, 20 नवंबर को मुख्यमंत्री आवास कूच करेंगे किसान-आदिवासी
बारां के शाहबाद जंगल में 1800 मेगावाट PSP परियोजना के खिलाफ आंदोलन तेज हो गया है। संगठनों ने 1.19 लाख पेड़ों की कटाई और कुनो नदी पर असर का मुद्दा उठाते हुए 20 नवंबर को मुख्यमंत्री आवास कूच का ऐलान किया।
तस्वीर में जयपुर में पीपल्स ग्रीन पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शाहबाद कंजर्वेशन रिजर्व बचाओ आंदोलन से जुड़े लोग बैठे नजर आ रहे हैं।
बारां। राजस्थान के बारां जिले में स्थित शाहबाद कंजर्वेशन रिजर्व (शाहबाद जंगल) में निजी क्षेत्र के 1800 मेगावाट के वाटर पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट (PSP) लगाने के सरकारी फैसले के खिलाफ पर्यावरण प्रेमियों और जन-संगठनों ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। पीपल्स ग्रीन पार्टी (PGP), शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन, चंबल संसद और शाहबाद संरक्षण समिति ने संयुक्त मोर्चा बनाकर 20 नवंबर को शाहबाद क्षेत्र के हजारों किसानों, सहरिया आदिवासियों और युवाओं के जयपुर स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुंचने की घोषणा की है। यहां वे सरकार के साथ सीधे संवाद करेंगे।
पीपल्स ग्रीन पार्टी (PGP) कार्यालय जयपुर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में पार्टी अध्यक्ष डॉ. सुधांशु और ‘शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन’ के प्रमुख गब्बर यादव ने मीडिया को लिखित नोट जारी किया। उन्होंने कहा कि सरकार विकास के नाम पर क्षेत्र में प्राकृतिक त्रासदी को आमंत्रित कर रही है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक परियोजना के लिए 1 लाख 19 हजार 759 पेड़ों की कटाई की तैयारी है। संगठनों का कहना है कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को देखें तो 5 लाख से अधिक पेड़-पौधे और दुर्लभ जड़ी-बूटियां सीधे तौर पर नष्ट हो जाएंगी। इससे सालाना लाखों मीट्रिक टन कार्बन सोखने की क्षमता भी खत्म हो जाएगी।
चंबल संसद के अध्यक्ष बृजेश विजय और जल क्रांतिकारी रोबिन सिंह ने साझा बयान में कहा कि परियोजना के कारण शाहबाद और आसपास के करीब 500 गांवों की खेती, पानी और आजीविका पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। प्रोजेक्ट के लिए क्षेत्र की जीवनदायिनी कुनो नदी के पानी को लिफ्ट और रीसायकल करने की योजना है। उनके अनुसार इससे नदी का प्राकृतिक बहाव खत्म हो जाएगा और भूमिगत जल स्तर पाताल में चला जाएगा, जिससे पूरा क्षेत्र भयंकर सूखे की चपेट में आ सकता है।
बयान में कहा गया कि सदियों से जंगलों पर आश्रित सहरिया आदिवासी समुदाय और स्थानीय किसान बेघर और भूमिहीन होने की कगार पर पहुंच जाएंगे।
गब्बर सिंह यादव ने कहा कि शाहबाद का घना जंगल केवल पेड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के शेड्यूल-1 के तहत संरक्षित दुर्लभ वन्यजीवों, जैसे पैंथर, भालू, जरख, भेड़िए और गिद्धों का प्राकृतिक आवास है। उन्होंने कहा कि यह जंगल मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क और राजस्थान के गांधी सागर अभयारण्य को जोड़ने वाले 17,000 वर्ग किलोमीटर के ‘चीता कॉरिडोर’ का बेहद संवेदनशील हिस्सा है। उनके अनुसार यहां बिजलीघर और बांध बनने से चीतों का अंतरराज्यीय आवागमन पूरी तरह अवरुद्ध हो जाएगा।
पीपल्स ग्रीन पार्टी के अध्यक्ष डॉ. सुधांशु ने कहा कि यदि सरकार ने अपनी हठधर्मिता नहीं छोड़ी और केंद्र व राज्य सरकार द्वारा दी गई सैद्धांतिक मंजूरियों को तुरंत रद्द नहीं किया, तो 20 नवंबर को शाहबाद की मिट्टी से उठा जनाक्रोश सीधे मुख्यमंत्री आवास की चौखट पर पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी, युवा और किसान सरकार से इस विनाश को रोकने के लिए सीधी बात करेंगे।
डॉ. सुधांशु ने कहा, “जब तक पर्यावरण विरोधी फैसला वापस नहीं होता, हमारा शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।” 20 नवंबर को प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास कूच को शाहबाद जंगल, कुनो नदी, स्थानीय आजीविका और जैव विविधता से जुड़े मुद्दों पर संगठनों के अगले चरण के आंदोलन के रूप में देखा जा रहा है।