फर्जी पोर्नोग्राफिक ऐप से साइबर ठगी का बड़ा खतरा, राजस्थान पुलिस ने जारी की एडवाइजरी
राजस्थान पुलिस ने फर्जी पोर्नोग्राफिक ऐप और संदिग्ध एपीके से साइबर ठगी को लेकर एडवाइजरी जारी की, सितंबर में चलेगा विशेष जागरूकता अभियान।
राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने फर्जी एवं पोर्नोग्राफिक एंड्रॉइड ऐप के जरिए की जा रही साइबर धोखाधड़ी को लेकर आमजन के लिए एडवाइजरी जारी की है। महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार जारी इस एडवाइजरी में सोशल मीडिया पर प्रसारित अश्लील विज्ञापनों, संदिग्ध लिंक और एपीके फाइलों से सावधान रहने की अपील की गई है।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री वीके सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से अश्लील विज्ञापन और लिंक प्रसारित कर लोगों को फर्जी वेबसाइटों तक ले जाते हैं। यहां उपयोगकर्ताओं को संदिग्ध एपीके फाइल डाउनलोड और इंस्टॉल करने के लिए प्रेरित किया जाता है। ऐप इंस्टॉल होने के बाद अपराधी मोबाइल की संवेदनशील अनुमतियां हासिल कर डिवाइस का नियंत्रण अपने हाथ में ले सकते हैं और इसके जरिए साइबर ठगी को अंजाम देते हैं।
एडवाइजरी के अनुसार सोशल मीडिया पर "Night Play", "Reloop", "Kyss", "Vimo", "Rivo", "Nexo", "Vixa" जैसे नामों तथा इसी तरह के अन्य नामों से विज्ञापन प्रसारित किए जा रहे हैं। इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद उपयोगकर्ता को अश्लील वेबसाइटों पर ले जाकर संदिग्ध एपीके डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया जाता है।
साइबर ठगी के इस तरीके में अपराधी सबसे पहले टेलीग्राम, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अश्लील विज्ञापन या लिंक प्रसारित करते हैं। लिंक पर क्लिक करने वाले उपयोगकर्ता को फिशिंग वेबसाइट पर ले जाया जाता है और अज्ञात स्रोत से एपीके फाइल डाउनलोड एवं इंस्टॉल करने के लिए उकसाया जाता है।
ऐप इंस्टॉल होने के बाद 'ऐप अपडेट' के नाम पर दूसरा पैकेज डाउनलोड और इंस्टॉल कराया जा सकता है। इसके बाद उपयोगकर्ता से एक्सेसिबिलिटी (Accessibility) एवं अन्य संवेदनशील परमिशन मांगी जाती हैं। अनुमति मिलते ही संदिग्ध ऐप मोबाइल में वायरस सक्रिय कर डिवाइस पर नियंत्रण हासिल कर सकता है और बैकग्राउंड में काम करता रहता है।
कुछ संदिग्ध ऐप मोबाइल फोन में वीपीएन भी इंस्टॉल कर देते हैं। इसके जरिए मोबाइल का इंटरनेट ट्रैफिक साइबर अपराधियों के सर्वर से संचालित हो सकता है। डिवाइस का नियंत्रण अपराधियों के हाथ में जाने के बाद वे उपयोगकर्ता के बैंक खाते और अन्य वित्तीय संसाधनों से अनधिकृत लेनदेन कर सकते हैं। कुछ संदिग्ध ऐप उपयोगकर्ता को उन्हें सामान्य तरीके से अनइंस्टॉल करने से भी रोक सकते हैं।
राजस्थान पुलिस ने सोशल मीडिया विज्ञापनों, संदिग्ध वेबसाइटों या अज्ञात लिंक से एपीके फाइल डाउनलोड नहीं करने की सलाह दी है। अनजान ऐप्स को एक्सेसिबिलिटी परमिशन बिल्कुल नहीं देने, एप्लिकेशन केवल गूगल प्ले स्टोर या अन्य विश्वसनीय ऐप स्टोर से डाउनलोड करने तथा फोन में इंस्टॉल ऐप्स की नियमित समीक्षा कर किसी अनजान ऐप को तुरंत हटाने को कहा गया है। साथ ही गूगल प्ले प्रोटेक्ट को चालू रखने और मोबाइल डिवाइस को अपडेटेड रखने की सलाह दी गई है। लोगों से अपने बैंक खाते और यूपीआई ट्रांजैक्शंस पर नियमित रूप से नजर रखने को भी कहा गया है।
यदि कोई संदिग्ध ऐप सामान्य तरीके से अनइंस्टॉल नहीं हो रहा है तो फोन को सेफ मोड में शुरू करने की सलाह दी गई है। इसके लिए पावर ऑफ विकल्प को तब तक दबाकर रखना होगा, जब तक सेफ मोड का विकल्प दिखाई न दे। इसके बाद ओके अथवा रीस्टार्ट इन सेफ मोड पर क्लिक करना होगा। फोन के Safe Mode में शुरू होने के बाद Settings > Apps में जाकर संदिग्ध ऐप को चुनकर Uninstall किया जा सकता है। ऐप हटाने के बाद फोन को सामान्य रूप से Restart करने पर Safe Mode अपने आप हट जाएगा।
साइबर ठगी की घटना होने पर तत्काल निकटतम पुलिस स्टेशन, साइबर पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर सूचना देने की अपील की गई है। वित्तीय साइबर फ्रॉड होने पर बिना देरी किए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930, साइबर हेल्पडेस्क के नंबर 9256001930 एवं 9257510100 पर सूचना दी जा सकती है।
इसी क्रम में राजस्थान पुलिस सितंबर 2026 को "साइबर सुरक्षित राजस्थान" जन-जागरूकता माह के रूप में मनाएगी। महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार पूरे प्रदेश में महीने भर चलने वाले इस विशेष अभियान का उद्देश्य आमजन को साइबर अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक करना, सुरक्षा उपायों का व्यापक प्रचार-प्रसार करना तथा ऑनलाइन ठगी एवं धोखाधड़ी से सुरक्षित रहने के लिए सचेत करना है।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री विजय कुमार सिंह के अनुसार अभियान के सफल संचालन के लिए राज्य स्तर पर पुलिस अधीक्षक-1 (R4C) को राज्य नोडल अधिकारी बनाया गया है। वहीं प्रत्येक जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी को जिला नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अभियान के तहत पुलिस थानों के साइबर अपराध से जुड़े अधिकारी पेंशन विभाग के समन्वय से पेंशनर्स एवं वरिष्ठ नागरिकों को विशेष रूप से 'डिजिटल अरेस्ट', निवेश के नाम पर होने वाली ठगी तथा अन्य साइबर अपराधों से बचाव के बारे में जागरूक करेंगे।
जिला कलेक्टर एवं जिला शिक्षा अधिकारियों के समन्वय से स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में व्याख्यान, कार्यशालाएं, प्रश्नोत्तरी, सेमिनार एवं विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। छात्र-छात्राओं द्वारा एक दिवसीय मानव श्रृंखला बनाकर साइबर सुरक्षा का संदेश भी दिया जाएगा।
प्रमुख सार्वजनिक स्थलों, बाजारों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन तथा धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर नुक्कड़ नाटक, पोस्टर, ऑडियो-वीडियो संदेश और साइबर जागरूकता स्टॉल के माध्यम से आमजन को साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी दी जाएगी।
अभियान में साइबर स्वयंसेवकों, एनएसएस एवं एनसीसी कैडेट्स को भी जोड़ा जाएगा। आरएसी इकाइयों और जिला खेल अधिकारियों के समन्वय से साइबर जागरूकता के लिए दौड़ एवं साइकिल रैली जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
राज्य पुलिस अभियान को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए जिला मुख्य डाकपाल एवं पंचायती राज विभाग के समन्वय से ग्राम पंचायत स्तर तक साइबर जागरूकता गतिविधियां आयोजित करेगी। वहीं स्थानीय सोशल मीडिया प्रभावशाली व्यक्तियों, खेल एवं सिनेमा जगत की हस्तियों के माध्यम से वीडियो अपील जारी करवाई जाएंगी।
इसके अलावा स्थानीय एफएम, टेलीविजन चैनल, सिनेमा हॉल, निजी केबल टीवी तथा बाजारों में लगे डिजिटल डिस्प्ले के माध्यम से हिंदी एवं क्षेत्रीय भाषाओं में साइबर सुरक्षा संबंधी संदेश प्रसारित किए जाएंगे। फर्जी ऐप, संदिग्ध एपीके और ऑनलाइन ठगी से बचाव के साथ सितंबर 2026 में चलने वाला यह राज्यव्यापी अभियान साइबर सुरक्षा के प्रति व्यापक जन-जागरूकता पर केंद्रित रहेगा।