सूरवाल सिंचाई परियोजना का कायाकल्प, 22 गांवों के किसानों को मिलेगा पानी
राजस्थान सरकार 25.36 करोड़ रुपये से सूरवाल बांध का पुनरोद्धार करा रही है, जिससे 4,847 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी।
सवाई माधोपुर। जिले के कृषि और ग्रामीण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण सूरवाल मध्यम सिंचाई परियोजना का अब कायाकल्प किया जा रहा है। राज्य सरकार दशकों पुरानी इस जल संरचना और इससे जुड़ी नहर प्रणाली को आधुनिक तकनीक के अनुरूप सुदृढ़ करने में जुटी है। जल संसाधन विभाग ने राजस्थान जल क्षेत्र आजीविका सुधार परियोजना के तहत पुनरोद्धार कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया है। परियोजना पूरी होने के बाद 22 गांवों की 4,847.71 हेक्टेयर कृषि भूमि को बेहतर सिंचाई सुविधा मिलेगी और करीब 8 हजार कृषक परिवार लाभान्वित होंगे।
जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर सूरवाल गांव के समीप स्थित इस बांध की आधारशिला वर्ष 1954 में रखी गई थी। अब बांध से जुड़ी नहर प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए व्यापक पुनरोद्धार कार्य कराया जा रहा है। इससे बांध और नहर तंत्र में होने वाली जल क्षति कम होगी, रिसाव रुकेगा और नहरों के जरिए पानी को अंतिम छोर यानी टेल एंड तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में मदद मिलेगी।
सूरवाल बांध की कुल लंबाई 4,200 मीटर है और 15 फीट पर इसकी भराव क्षमता 917.80 एमसीएफटी है। बांध से 43.22 किलोमीटर लंबाई की एक मुख्य नहर और पांच माइनर निकलते हैं। वर्तमान में 35.701 किलोमीटर लंबाई के नहरी तंत्र के पुनरोद्धार का कार्य प्रस्तावित है।
सूरवाल सिंचाई परियोजना के लिए राज्य सरकार ने 25.36 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक परियोजना का दो-तिहाई से अधिक कार्य पूर्ण हो चुका है। इसे जुलाई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बांध, मुख्य नहर और पांच माइनरों के जीर्णोद्धार के साथ सभी नहरों की पक्की लाइनिंग का कार्य कराया जा रहा है। इससे जल रिसाव और छीजत में कमी आएगी तथा अंतिम छोर पर स्थित किसानों तक भी सिंचाई पानी पहुंचाने में मदद मिलेगी।
परियोजना के तहत 10 नई पुलिया, 10 कैटल रैम्प, 10 फुटब्रिज, 64 डिग्गियां, 2 जल उपयोगिता रांगम भवन, 3 फॉल, 6 टेल क्रेटर और 110 आउटलेट पाइप सहित विभिन्न संरचनाओं का निर्माण प्रस्तावित है। इसके साथ ही मौजूद संरचनाओं की मरम्मत का कार्य भी कराया जाएगा।
परियोजना से लाभान्वित होने वाले 22 गांवों में सूरवाल, महू, अजनोटी, नींनदड़ा, श्यामोता, मैनपुरा, कोशाली, भैंसखेड़ा, पड़ाना, गोगोर, जटवाड़ा कलां, खाट खुर्द, घनोली, गोतड़ा, दोबड़ा कलां, दुब्बी खुर्द, कांसीर, जड़ावता, खाट कलां, सेलू, चकेरी और दुब्बी बनास शामिल हैं।
सूरवाल बांध के सुदृढ़ीकरण के साथ डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में ओवरफ्लो पानी की समुचित निकासी के लिए भी कार्य शुरू किया गया है। अधिशाषी अभियंता अरुण शर्मा ने बताया कि इस कार्य के लिए जल संसाधन विभाग ने मुख्यमंत्री बजट घोषणा 2026-27 के तहत 61.08 लाख रुपये का कार्यादेश जारी किया है।
इस कार्य के तहत सूरवाल बांध के डाउनस्ट्रीम क्षेत्र का विस्तृत सर्वे किया जा रहा है। सर्वे के आधार पर वर्षा अथवा बांध के ओवरफ्लो के दौरान प्राप्त होने वाले पानी की सुरक्षित और समुचित निकासी के लिए आवश्यक कार्यों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। डीपीआर में आवश्यक जल निकासी व्यवस्था, प्रस्तावित संरचनाओं तथा संबंधित कार्यों का तकनीकी परीक्षण और विस्तृत विवरण शामिल होगा।
सूरवाल सिंचाई परियोजना के पुनरोद्धार से सवाई माधोपुर के कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य आगे बढ़ रहा है। नहरी तंत्र के सुदृढ़ीकरण से कृषि गतिविधियों को मजबूती मिलने के साथ किसानों की आजीविका, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय विकास को लाभ मिलेगा। वहीं, ओवरफ्लो पानी की निकासी के लिए दीर्घकालीन और तकनीकी समाधान की दिशा में आगे की कार्ययोजना भी तैयार होगी।