तस्वीर में जागरूकता शिविर के दौरान बच्चों को सुरक्षा और विधिक अधिकारों की जानकारी देती हुई न्यायिक अधिकारी दिख रही हैं।

सवाई माधोपुर में बच्चों को अपहरण, शोषण, बाल तस्करी और बाल श्रम जैसी गंभीर समस्याओं से बचाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सवाई माधोपुर के तत्वावधान में ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे के अवसर पर न्यायिक अधिकारियों और पैनल अधिवक्ताओं ने विभिन्न स्कूलों में जागरूकता शिविर आयोजित किए। इन शिविरों में लगभग 2350 बच्चों को ‘स्ट्रेंजर डेंजर-नो, गो, टेल’ यानी ‘अजनबी से सावधान- मना करो, दूर जाओ, बताओ’ के माध्यम से सुरक्षा उपायों और विधिक अधिकारों की जानकारी दी गई।

जिला मुख्यालय सवाई माधोपुर में विशेष न्यायाधीश पोक्सो न्यायालय संख्या-01 मीनाक्षी जैन ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय दोंदरी, विशेष न्यायाधीश पोक्सो न्यायालय संख्या-02 प्रेमराज सिंह चन्द्रावत ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पचीपल्या, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मयंक पालीवाल ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बाडोलास, प्रिंसीपल मजिस्ट्रेट किशोर न्याय बोर्ड निधि शर्मा ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय नयापुरा तथा सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट दीपांजलि जादौन ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय हिंगोनी में जागरूकता शिविर आयोजित किया।

तालुका गंगापुर सिटी में अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संख्या-02 रेशमा खान ने राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय उदेई कलां, अति. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मीनाक्षी अमित चौधरी ने महात्मा गांधी उच्च माध्यमिक विद्यालय तलावड़ा, अति. सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-01 भरत पूनियां ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय अमरगढ तथा अति. सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-02 मीनाक्षी चौधरी ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मालियों की चौकी में शिविर आयोजित किया।

तालुका बौंली में अध्यक्ष तालुका विधिक सेवा समिति विकास नेहरा ने गोल्डन उच्च माध्यमिक विद्यालय बौंली तथा तालुका खण्डार में अध्यक्ष तालुका विधिक सेवा समिति रविन्द्र कुमार कुंतल ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मेई खुर्द में जागरूकता शिविर लगाया।

इसी प्रकार डिप्टी एलएडीसी वीरेन्द्र कुमार वर्मा ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय छारोदा, पैनल अधिवक्ता नंदकिशोर बैरवा ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रईथा, चन्द्रप्रकाश जांगिड ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय अजनोटी, प्रशांत गुप्ता ने महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय जटवाडा कलां, मुकेश बंसल ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय दोबड़ा कलां और बृजेन्द्र विजयवर्गीय ने महात्मा गांधी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय श्यामपुरा में जागरूकता शिविर आयोजित किया।

गंगापुर सिटी में मनीष कुमार अग्रवाल ने मित्तल आदर्श सीनियर सैकण्डरी स्कूल, रविशंकर शर्मा एवं रामस्वरूप टटवाल ने संगम चिल्ड्रन एकेडमी, हेमेन्द्र कुमार शर्मा ने जिनेन्द्र आदर्श माध्यमिक विद्यालय, दिलीप कुमार ने राजस्थान विद्यापीठ सैकण्डरी स्कूल, तन्वय श्रीवास्तव ने भगवती सीनियर सैकण्डरी स्कूल, प्रतिभा सोनी ने आर्य बाल सीनियर सैकण्डरी स्कूल, संतोष वर्मा ने सुभाष चिल्ड्रन सीनियर सैकण्डरी स्कूल तथा नीरज खण्डेलवाल ने अरिहन्त सीनियर सैकण्डरी स्कूल में शिविर आयोजित किया।

रामसिंह मीना ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गुर्जर बड़ौदा एवं बादामी देवी स्कूल शितोड तथा मोहम्मद जाहिद शिरवानी ने लक्ष्य माध्यमिक विद्यालय बौंली में जागरूकता शिविर आयोजित किया।

शिविरों में बच्चों को अपहरण एवं शोषण से बचाव, बाल तस्करी तथा बाल श्रम जैसी गंभीर सामाजिक समस्याओं के संबंध में आवश्यक जानकारी दी गई। बच्चों को बताया गया कि किसी भी अपरिचित व्यक्ति द्वारा दिए गए प्रलोभन, लालच या बहकावे में नहीं आना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति उन्हें कहीं साथ चलने, कोई वस्तु देने अथवा किसी प्रकार का लालच देने का प्रयास करे तो ऐसी स्थिति में ‘नो, गो एवं टेल’ के सिद्धांत को अपनाना चाहिए।

बच्चों को समझाया गया कि खतरा महसूस होने पर तुरंत खतरे को पहचानें, स्पष्ट रूप से मना करें, सुरक्षित स्थान की ओर जाएं और घटना की जानकारी किसी विश्वसनीय बड़े व्यक्ति अथवा चाइल्ड हेल्पलाईन नंबर 1098 को दें। शिविर के दौरान अपहरण के कारणों, इसके बच्चों के जीवन पर पड़ने वाले शारीरिक एवं मानसिक प्रभावों तथा स्वयं की सुरक्षा के लिए बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी जानकारी दी गई।

इसके अतिरिक्त बाल तस्करी, बाल श्रम, जबरन भीख मंगवाने एवं बच्चों के शोषण जैसी समस्याओं पर विस्तार से जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम में किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015, लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम 2012 एवं नालसा (बच्चों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाएं) योजना 2024 के प्रमुख प्रावधानों के बारे में भी बताया गया।

बच्चों को बताया गया कि कानून द्वारा बच्चों की सुरक्षा, देखभाल, संरक्षण, पुनर्वास एवं उनके सर्वाेत्तम हित को विशेष महत्व दिया गया है। किसी भी बच्चे के साथ अपराध या शोषण होने की स्थिति में उसे विधिक सहायता एवं संरक्षण प्राप्त करने का अधिकार है।

शिविरों में बच्चों को सोशल मीडिया के सुरक्षित एवं सावधानीपूर्वक उपयोग के संबंध में भी जागरूक किया गया। उन्हें समझाया गया कि सोशल मीडिया पर अपना पता, मोबाइल नंबर, पासवर्ड, स्कूल की जानकारी, निजी फोटो अथवा अन्य व्यक्तिगत जानकारी अज्ञात व्यक्तियों के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति द्वारा ऑनलाइन दोस्ती, चौट, वीडियो कॉल अथवा मिलने का दबाव बनाए जाने पर तत्काल अपने माता-पिता अथवा शिक्षक को जानकारी देनी चाहिए।

जागरूकता शिविरों के माध्यम से बच्चों को यह संदेश दिया गया कि सावधानी, जागरूकता और समय पर सूचना देना ही बाल अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है। बच्चों से अपील की गई कि वे स्वयं जागरूक होने के साथ-साथ अपने साथियों एवं अन्य बच्चों को भी उनकी सुरक्षा और विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक करें।

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