हिंडौन में पर्यूषण महापर्व पर धार्मिक अनुष्ठान, संवत्सरी पर हुई क्षमायाचना
हिंडौन में पर्यूषण महापर्व पर धार्मिक आयोजन, संवत्सरी पर्व पर क्षमायाचना और तपस्याओं के साथ 15 सितंबर को पर्व का समापन हुआ।
तस्वीर में हिंडौन सिटी के पल्लीवाल मंदिर में पर्यूषण महापर्व के दौरान पूजा करते हुए श्रद्धालु दिख रहे हैं.
हिंडौन सिटी में पर्यूषण महापर्व के अवसर पर श्री जैन श्वेतांबर पल्लीवाल मंदिर चैरिटेबल ट्रस्ट, मोहन नगर हिंडौन सिटी में प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। पर्यूषण महापर्व 8 सितंबर से प्रारंभ होकर 15 सितंबर तक चला। इस दौरान समाजजनों ने धार्मिक अनुष्ठानों, तपस्या, प्रतिक्रमण और प्रवचन में सहभागिता की।
महापर्व के दौरान प्रतिदिन प्रतिक्रमण, स्नात्र पूजा एवं चौबीसी पूजा का आयोजन किया गया। तपोवन भूमि अहमदाबाद से पधारे भाइयों द्वारा शास्त्र वाचन और प्रवचन किए गए। साधर्मिक बच्चों द्वारा प्रतिदिन प्रभु की सुंदर-सुंदर अंग रचना की गई। इसके अलावा सायं प्रतिक्रमण, भक्ति संध्या और आरती सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
अध्यक्ष महावीर प्रसाद जैन एवं सुनील जैन ने बताया कि नवीन उपाश्रय मोहन नगर हिंडौन में भगवान की स्नात्र पूजा, कलशाभिषेक, वार्षिक पूजा की बोलियां एवं पल्लीवाल क्षेत्र की परंपरा के अनुसार माला की बोली लगाई गई। माला की बोली बाबू लाल प्रदीप कुमार जैन दिवारया परिवार, हिंडौन ने 3,05,555 रुपए में ली। इसके साथ ही संवत्सरी पर्व मनाया गया।
संवत्सरी पर्व पर समाज के सभी जन एक-दूसरे से क्षमा याचना करते हैं और ‘मिच्छामि दुक्कडम’ बोलते हैं। इस परंपरा के माध्यम से वर्षभर में मन, वचन और कर्म से हुई भूलों के लिए परस्पर क्षमायाचना की गई।
वर्धमान जैन एवं आदित्य जैन ने बताया कि 16 सितंबर को साधर्मिक भाई-बहनों द्वारा तेला यानी तीन दिवस और तेला से ऊपर की तपस्या करने वाले सभी तपस्वियों का पारणा, बहुमान एवं सकल श्री संघ की नवकारसी का लाभ रिंकू जैन, टिंकू जैन, पटोंदा वाले परिवार द्वारा लिया गया है। लाभार्थी परिवार द्वारा 16 सितंबर बुधवार को लक्ष्मी पैलेस, हिंडौन सिटी में प्रातः 7.30 बजे आठ दिन, पांच दिन और तीन दिन की तपस्या करने वाले तपस्वियों का पारणा एवं बहुमान किया जाएगा।
पर्यूषण पर्व के दौरान 25 अठाई, 10 पंचोला और 55 तेला की तपस्या की गई। धार्मिक आयोजनों और तपस्याओं के साथ संपन्न हुए पर्यूषण महापर्व में संवत्सरी पर्व पर सामूहिक क्षमायाचना ने जैन समाज की धार्मिक परंपराओं और आत्मावलोकन की भावना को प्रमुखता दी।