गंगापुर सिटी नगर परिषद: सभापति पद पर घमासान, 16 निर्दलीय पार्षद तय करेंगे बोर्ड
60 वार्डों में कांग्रेस को 27 और भाजपा को 17 सीटें मिली हैं। 31 के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए दोनों दल निर्दलीयों को साधने और बाड़ाबंदी में जुटे।
तस्वीर में माला पहने एक व्यक्ति अन्य समर्थकों और संवाददाताओं के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।
नगर परिषद गंगापुर सिटी के चुनाव परिणाम सामने आने के बाद अब सभापति पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। 60 वार्डों वाली नगर परिषद में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने से सभापति की कुर्सी का फैसला अब 16 निर्दलीय पार्षदों के रुख पर निर्भर हो गया है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही निर्दलीय पार्षदों को अपने पक्ष में करने की कवायद में जुट गई हैं। पार्षदों की बाड़ाबंदी को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं।
सभापति पद के लिए कांग्रेस की ओर से कृष्ण कुमार गोयल, गिरधारीलाल, वीरेंद्र अग्रवाल और पंकज मंगलम के नाम चर्चा में हैं। वहीं भाजपा की ओर से गीता देवी नरूका और इसके अलावा निर्दलीय पार्षद विजय गुप्ता भी सभापति पद की दौड़ में बताए जा रहे हैं। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों के दावेदार निर्दलीय पार्षदों से संपर्क साधने में जुटे हुए हैं।
पूर्व सभापति शिवरतन अग्रवाल ने इस बार पार्षद का चुनाव नहीं लड़ा है। इसके बावजूद सभापति पद के प्रमुख दावेदारों में उनका नाम चर्चा में बना हुआ है। राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए उनके अनुभव और पूर्व में नगर परिषद का नेतृत्व करने के कारण उन्हें महत्वपूर्ण दावेदार माना जा रहा है।
सभापति पद के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मंगलवार को रिटर्निंग अधिकारी कार्यालय से सभापति पद के नामांकन के लिए कई आवेदन लिए गए। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही पार्षदों के समर्थन का आंकड़ा जुटाने की कवायद भी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में राजनीतिक तस्वीर और अधिक स्पष्ट होने की संभावना है।
नगर परिषद के 60 वार्डों के चुनाव परिणाम में कांग्रेस 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। बोर्ड गठन के लिए बहुमत का आंकड़ा 31 है। ऐसे में कांग्रेस को बहुमत के लिए महज 4 पार्षदों के समर्थन की जरूरत है। करीब 15 साल बाद कांग्रेस नगर परिषद में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई है, लेकिन स्पष्ट बहुमत नहीं होने के कारण उसे भी निर्दलीयों का सहारा लेना पड़ेगा।
भाजपा ने 17 वार्डों में जीत दर्ज की है। बहुमत के 31 के आंकड़े तक पहुंचने के लिए भाजपा को 14 पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। वहीं 16 निर्दलीय पार्षदों की जीत ने पूरे समीकरण को रोचक बना दिया है। बोर्ड गठन से लेकर सभापति के चुनाव तक निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक रहने वाली है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 16 निर्दलीय पार्षद किसके साथ जाते हैं। यदि कांग्रेस चार निर्दलीयों को अपने पक्ष में करने में सफल रहती है तो उसका बोर्ड बन सकता है, जबकि भाजपा के लिए बहुमत का आंकड़ा हासिल करना अपेक्षाकृत कठिन चुनौती है। हालांकि सभापति पद के चुनाव में व्यक्तिगत समीकरण और निर्दलीय पार्षदों का रुख अंतिम समय में पूरे राजनीतिक समीकरण को बदल सकता है। ऐसे में गंगापुर सिटी नगर परिषद में सभापति पद को लेकर आने वाले दिनों में समर्थन जुटाने की कवायद पर सभी की नजर रहेगी।