आमेट। राजस्थान के निजी विद्यालयों की समस्याओं के समाधान, उनके अधिकारों की रक्षा और संगठन को प्रदेश के प्रत्येक जिले तक मजबूत बनाने के उद्देश्य से निजी विद्यालय संघर्ष समिति, राजस्थान ने प्रदेशभर में संगठनात्मक विस्तार की प्रक्रिया तेज कर दी है। समिति की ओर से विभिन्न जिलों में 41 जिला संयोजकों की नियुक्तियां की गई हैं।

समिति के प्रदेश संयोजक श्री लाल सिंह झाला ने बताया कि संगठन निजी विद्यालयों की समस्याओं को सरकार एवं संबंधित विभागों के समक्ष मजबूती से रखने और उनके समाधान के लिए निरंतर संघर्षरत है। संगठन को अधिक सक्रिय, संगठित एवं मजबूत बनाने के उद्देश्य से विभिन्न जिलों में सक्रिय, समर्पित शिक्षाविदों एवं निजी विद्यालय संचालकों को संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

नव नियुक्त जिला संयोजकों में श्री सतीश सिंह शेखावत – बहरोड़-कोटपुतली, श्री पवन चौधरी – खैरथल-तिजारा, श्री नेपाल सिंह पंवार – डूंगरपुर, श्री शिव प्रसाद सनाढ्य – राजसमन्द, श्री प्रवीण कुमार जोशी – जोधपुर, श्री भोजराज सिंह राठौड़ – बाड़मेर, श्री सुरेन्द्र कुमार जयपाल – जैसलमेर, श्री विक्रम श्रीमाली – जालोर, श्री भरत विजयवर्गीय – उदयपुर, श्री नरेन्द्र सिंह रावल – अजमेर, श्री जशवंत सिंह – ब्यावर, श्री प्रशान्त नाहटा – बांसवाड़ा, श्री दशरथ सिंह – सिरोही, श्री जितेन्द्र सिंह – डीडवाना-कुचामन, श्री हरचरण सिंह किंगरा – हनुमानगढ़, श्री मूलचन्द शर्मा – बूंदी, श्री प्रकाश बारुपाल – पाली, श्री सी.पी. डिडवानिया – भीलवाड़ा, श्री संदीप शर्मा – श्रीगंगानगर, श्री चन्द्रभान चौधरी – जयपुर ग्रामीण, श्री रतनलाल सैनी – जयपुर, श्री सौरव शर्मा – भरतपुर, श्री प्रवीन कुमार प्रजापति – करौली, श्री नेमीचंद शर्मा – धौलपुर, श्री रामराज मीणा – सवाई माधोपुर, श्री अमित वर्मा – बीकानेर, श्री जमना शंकर प्रजापति – कोटा, श्री खेत सिंह इन्दा – बालोतरा, श्री धन सिंह राठौड़ – फलौदी, श्री महेन्द्र कुमार सैनी – अलवर, श्री लोकेश जैन – टोंक, श्री खेमसिंह डींग – भरतपुर, श्री पुरण गिरी गोस्वामी – चित्तौड़गढ़, श्री गोविंद सिंह चौहान – सलूम्बर, श्री रणवीर कस्वाँ – चूरू, श्री नरेन्द्र पुनिया – झुंझुनूं, श्री ओम प्रकाश ग्वाला – नागौर, श्री देवी सिंह कुशावाह – झालावाड़, श्री पंकज उपाध्याय – प्रतापगढ़, श्री मुकेश शर्मा – बारां तथा श्री प्रताप सिंह – दौसा को जिला संयोजक नियुक्त किया गया है।

प्रदेश संयोजक श्री लाल सिंह झाला ने सभी नव नियुक्त जिला संयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का हित नहीं, बल्कि राजस्थान के सभी निजी विद्यालयों की समस्याओं का समाधान एवं उनके अधिकारों की रक्षा करना है।

उन्होंने कहा कि सभी जिला संयोजकों से अपेक्षा की गई है कि वे अपने-अपने जिलों में निजी विद्यालय संचालकों, शिक्षकों एवं शिक्षा से जुड़े साथियों को संगठन से जोड़ते हुए एक मजबूत एवं सक्रिय संगठनात्मक ढांचा तैयार करेंगे।

श्री झाला ने कहा कि आरटीई पुनर्भरण राशि, निजी विद्यालयों पर अनावश्यक निरीक्षणों का दबाव, विभिन्न विभागीय नियमों से संबंधित व्यावहारिक समस्याएं तथा अन्य लंबित मुद्दों को संगठन निरंतर सरकार एवं संबंधित विभागों के समक्ष मजबूती से उठाता रहेगा।

उन्होंने कहा कि निजी विद्यालयों की समस्याओं का समाधान केवल संगठित प्रयासों से ही संभव है। इसके लिए प्रदेश के प्रत्येक निजी विद्यालय संचालक, शिक्षक एवं शिक्षा से जुड़े साथी को एक मजबूत संगठनात्मक मंच से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रदेश संयोजक श्री लाल सिंह झाला ने बताया कि इससे पूर्व समिति द्वारा प्रदेश के विभिन्न संभागों में संभाग संयोजकों की नियुक्तियां की जा चुकी हैं। अब संगठन द्वारा चरणबद्ध तरीके से प्रदेश कार्यकारिणी, संभाग कार्यकारिणी, जिला कार्यकारिणी एवं ब्लॉक कार्यकारिणियों का गठन किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि संगठन के विस्तार की इस व्यापक प्रक्रिया में प्रदेशभर के 15 हजार से अधिक सक्रिय सदस्यों को विभिन्न संगठनात्मक जिम्मेदारियां प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक स्तर पर सक्रिय, समर्पित एवं निजी विद्यालयों के हितों के लिए कार्य करने वाले साथियों को संगठन से जोड़कर एक मजबूत एवं प्रभावी टीम तैयार की जाएगी।

श्री झाला ने कहा कि निजी विद्यालय संघर्ष समिति, राजस्थान प्रदेश के निजी विद्यालयों की समस्याओं एवं हितों को मजबूती से उठाने वाला एक व्यापक एवं सक्रिय संगठन है। संगठन का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक निजी विद्यालय तक पहुंच बनाकर उनकी समस्याओं को एकजुट होकर सरकार एवं संबंधित विभागों के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना है।

समिति द्वारा शीघ्र ही प्रदेश स्तरीय बैठक आयोजित कर आगामी संगठनात्मक रणनीति एवं निजी विद्यालयों की प्रमुख समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। प्रदेशभर में जिला संयोजकों की नियुक्ति से संगठन को नई मजबूती मिलने तथा निजी विद्यालयों की आवाज को प्रदेश स्तर पर और अधिक प्रभावी ढंग से उठाने की उम्मीद जताई जा रही है।

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