तस्वीर में आमेट के सभा भवन में सफेद वस्त्र पहने श्रद्धालु जमीन पर बैठे हैं।

आमेट। तेरापंथ सभा भवन आमेट में युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के दिशा-निर्देशानुसार पर्युषण महापर्व के पांचवें दिन ‘व्रत चेतना दिवस’ श्रद्धा, साधना एवं आध्यात्मिक वातावरण के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में नाथद्वारा से पधारे उपासक प्रवक्ता श्री गणेशलाल जी मेहता एवं श्री सुभाष जी सामोता ने श्रावक समाज को व्रत चेतना के महत्व तथा आध्यात्मिक जीवन में उसकी उपयोगिता के बारे में संबोधित किया।

उपासक प्रवक्ता श्री गणेशलाल जी मेहता ने अणुव्रत अनुशास्ता पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री तुलसी द्वारा किए गए महत्वपूर्ण अवदानों एवं अणुव्रत आंदोलन की प्रेरणाओं पर प्रकाश डाला। वहीं श्री सुभाष जी सामोता ने व्रत चेतना दिवस की भावना को स्पष्ट करते हुए कहा कि व्रत केवल किसी नियम को स्वीकार करना नहीं, बल्कि जीवन को संयमित, अनुशासित एवं मर्यादित बनाने का संकल्प है।

उन्होंने कहा कि व्रत व्यक्ति को आत्मनिरीक्षण, त्याग और सदाचार की ओर प्रेरित करता है तथा उसके जीवन में आध्यात्मिक जागरूकता का विकास करता है। उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं को अपनी क्षमता के अनुसार व्रत एवं संयम को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम का शुभारंभ अणुव्रत समिति की बहनों रेणु छाजेड़, अनीता छाजेड़, रितु ढिलिवाल एवं चेतना डांगी द्वारा अणुव्रत गीत के संगान से हुआ। कार्यक्रम के अंत में अणुव्रत समिति अध्यक्ष रेणु छाजेड़ ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर सभी संस्थाओं के पदाधिकारी एवं श्रावक-श्राविकाओं की अच्छी उपस्थिति रही। कार्यक्रम की जानकारी प्रतिनिधि पवन कच्छारा ने दी।

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