तस्वीर में आमेट के तेरापंथ सभा भवन के अंदर सफेद वस्त्र और मुंहपत्ती पहने श्रावक-श्राविकाएं ध्यान और सामायिक साधना करते हुए नजर आ रहे हैं।

अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के निर्देशानुसार स्थानीय परिषद की ओर से आमेट स्थित तेरापंथ सभा भवन में पर्युषण महापर्व का तृतीय दिवस अभिनव सामायिक दिवस के रूप में श्रद्धा, साधना एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में श्रावक-श्राविकाओं ने सामायिक के माध्यम से आत्मचिंतन, संयम और समभाव की साधना की।

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के दिशा-निर्देशानुसार नाथद्वारा से पधारे उपासक प्रवक्ता गणेशलाल मेहता एवं सुभाष सामोता ने श्रावक समाज को सामायिक के महत्व और उसकी आध्यात्मिक उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रतिनिधि पवन कच्छारा ने “सामायिक तो समता का अभ्यास है, सामायिक को करने वाला पाता नया प्रकाश है” भावपूर्ण मंगलाचरण के साथ किया।

उपासक सुभाष सामोता ने सामायिक के दौरान ध्यान साधना कराई और विभिन्न मंत्रों का जाप करवाया। उपासक प्रवक्ता गणेशलाल मेहता ने भगवान महावीर के जीवन में समता के महत्व को समझाते हुए कहा कि सामायिक व्यक्ति को आत्मचिंतन, संयम और समभाव की ओर प्रेरित करती है।

इस अवसर पर कंठी तप की तपस्या करने वाली विमला देवी श्रीश्रीमाल एवं शकुंतला देवी भंडारी का तप अनुमोदन एवं सम्मान किया गया। तपस्विका सम्मान तेले की तपस्या करने वाले जीवन ज्योति बाफना, कमला देवी डूंगरवाल, टमु देवी चोरड़िया, निर्मला देवी मेहता एवं ज्ञानेश्वर मेहता तथा देवेंद्र मेहता (जैतपुर वाले) ने तपस्वियों का सम्मान किया। महिला मंडल मंत्री संगीता चंडालिया ने तपस्वियों के तप की अनुमोदना की।

कार्यक्रम के अंत में सामायिक संयोजक सुदीप छाजेड़ ने आभार व्यक्त किया। अभिनव सामायिक में लगभग 158 श्रावक-श्राविकाओं की संभागीय रही। कार्यक्रम की जानकारी प्रतिनिधि पवन कच्छारा ने दी।

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