साकीनाका मैनहोल हादसा: सहायक आयुक्त समेत 4 अधिकारी निलंबित
मुंबई की महापौर रितू तावडे ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर 10 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया, लापरवाही पर ठेकेदार ब्लैकलिस्ट।
तस्वीर में बाएं से दाएं खड़े कुछ पुरुष, बुर्का पहने एक महिला और मुंबई की महापौर रितू तावडे आपस में बातचीत करते हुए।
कुर्ला के साकीनाका स्थित खैरानी रोड पर खुले गटर में गिरने से 55 वर्षीय असलम इसाक शेख की दर्दनाक मौत के बाद मुंबई महानगरपालिका प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। गुरुवार को हादसे की सूचना मिलते ही मुंबई की महापौर रितू तावडे घटनास्थल पर पहुंचीं और पूरे घटनाक्रम का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने घाटकोपर स्थित राजावाडी अस्पताल पहुंचकर मृतक असलम शेख के बेटे, भाई और अन्य परिजनों से मुलाकात की, गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं तथा उन्हें ढांढस बंधाया।
महापौर रितू तावडे ने पीड़ित परिवार के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की ओर से ₹10 लाख की तत्काल आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। घटना को लेकर उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिडे से तत्काल संपर्क किया और दोषियों के विरुद्ध बिना किसी ढिलाई के दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
महापौर के निर्देशों के बाद बीएमसी प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रथम दृष्टया लापरवाही बरतने के आरोप में 'एल' वार्ड के सहायक आयुक्त धनाजी हेर्लेकर सहित चार वरिष्ठ अधिकारियों और इंजीनियरों को जांच पूरी होने तक तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। वहीं, सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर एक निर्दोष नागरिक की जान जोखिम में डालने वाले संबंधित ठेकेदार को भी स्थायी रूप से ब्लैकलिस्ट कर दिया गया।
हादसे की विस्तृत जांच के लिए अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की गई है, जिसे सात दिनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
घटनास्थल पर मीडिया से बातचीत के दौरान महापौर रितू तावडे ने कहा कि मानसून पूर्व तैयारियों की बैठकों में उन्होंने स्वयं अधिकारियों को प्रत्येक मैनहोल पर सुरक्षा जाली और ढक्कन सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए थे। सड़कों के कंक्रीटीकरण और नाला सफाई कार्यों के निरीक्षण के दौरान भी इस विषय को बार-बार दोहराया गया था। इसके बावजूद यदि जमीनी स्तर पर लापरवाही के कारण किसी नागरिक की जान जाती है, तो इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
महापौर ने स्पष्ट किया कि सात दिन बाद जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट प्राप्त होने पर दोषियों के विरुद्ध और भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन में किसी भी भ्रष्ट अथवा लापरवाह अधिकारी को किसी भी स्तर पर संरक्षण नहीं दिया जाएगा। साकीनाका मैनहोल हादसे के बाद बीएमसी की यह कार्रवाई न केवल जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी प्रशासन की सख्त मंशा को दर्शाती है।