मुंबई में 576 किमी सड़कों का कंक्रीटीकरण पूरा, बने 681 सोखते गड्ढे

बीएमसी की परियोजना के तहत सड़कों को मजबूती देने के साथ ही भूजल स्तर सुधारने और जलजमाव की समस्या से निपटने के लिए नई जल प्रबंधन तकनीक लागू की गई है।

Update: 2026-07-01 14:36 GMT

मुंबई के कांदिवली ईस्ट स्थित समता नगर रोड पर सड़क के किनारे बनाए गए सोखते गड्ढे का निर्माण कार्य।

मायानगरी मुंबई की सड़कों की बदहाली और गड्ढों की वर्षों पुरानी समस्या अब इतिहास बनने की ओर अग्रसर है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने शहर की जीवनरेखा कही जाने वाली सड़कों को आधुनिक बनाने के लिए एक अत्यंत महत्वाकांक्षी कंक्रीटीकरण परियोजना को युद्धस्तर पर संचालित किया है। बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिडे के मार्गदर्शन में चल रहे इस ऐतिहासिक अभियान का मुख्य उद्देश्य न केवल सड़कों को गड्ढों से मुक्त करना है, बल्कि उन्हें वैश्विक मानकों के अनुरूप स्थायित्व प्रदान करना भी है। इस वृहद परियोजना के तहत कुल 700 किलोमीटर लंबी सड़कों को कंक्रीट में तब्दील करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसमें से 576 किलोमीटर सड़कों का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर उन्हें यातायात के लिए खोल दिया गया है। यह उपलब्धि निर्धारित लक्ष्य का लगभग 81 प्रतिशत हिस्सा है, जिसने मुंबई के प्रमुख मार्गों पर आवागमन को अत्यंत सुगम और तीव्र बना दिया है।

सड़कों के कंक्रीटीकरण के साथ ही बीएमसी ने पर्यावरण संरक्षण और जल प्रबंधन की दिशा में एक साहसिक कदम उठाया है। कंक्रीट की सतह के कारण बारिश के पानी का जमीन में सोखना एक बड़ी चुनौती थी, जिसके समाधान के लिए 'स्टॉर्म वाटर मैनेजमेंट' तकनीक का सहारा लिया गया है। अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त अभिजीत बांगर ने इस अनूठी पहल की जानकारी देते हुए बताया कि मार्च 2026 तक मुंबई शहर, पूर्वी उपनगर और पश्चिमी उपनगरों में कुल 681 सोखते गड्ढों का निर्माण पूरा कर लिया गया है। इन गड्ढों का निर्माण वैज्ञानिक मानकों को ध्यान में रखकर किया गया है, जिनकी चौड़ाई 1.5 मीटर और गहराई 3 मीटर तक रखी गई है।

इन सोखते गड्ढों की कार्यप्रणाली बेहद प्रभावी है। गड्ढों के भीतर बड़े पत्थर, बजरी और रेत की परतें बिछाई गई हैं, जो एक प्राकृतिक फिल्टर की भांति कार्य करती हैं। सड़कों और नालियों का पानी जब इन गड्ढों में प्रवाहित किया जाता है, तो कचरा और प्लास्टिक को रोकने के लिए इनमें सिल्ट ट्रैप लगाए गए हैं, जिससे छनकर शुद्ध पानी भूजल स्तर को रिचार्ज करता है। प्रत्येक 400 से 500 मीटर की दूरी पर निर्मित ये गड्ढे मूसलाधार बारिश के दौरान सड़कों पर होने वाले जलजमाव की समस्या को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भविष्य में बची हुई सड़कों के कंक्रीटीकरण के साथ और अधिक सोखते गड्ढों का निर्माण कार्य जारी रहेगा। बीएमसी की यह दोहरी रणनीति मुंबई के बुनियादी ढांचे को न केवल मजबूती प्रदान कर रही है, बल्कि जल संकट से जूझते शहर के लिए एक स्थायी समाधान के रूप में उभरकर सामने आई है।

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