मानसून बीमारियों पर बीएमसी अलर्ट: अस्पतालों में बढ़ाई गई स्वास्थ्य सुविधाएं
बीएमसी ने मानसून जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए दवाओं के पर्याप्त स्टॉक और अस्पतालों में अतिरिक्त बेड की व्यवस्था के साथ महिला स्वास्थ्य पर भी जोर दिया है।
बीएमसी मुख्यालय में आयोजित बैठक में स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिकारी मानसूनी तैयारियों पर चर्चा करते हुए।
मुंबई में मानसून की दस्तक के साथ ही जलजनित और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, जिसे देखते हुए बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) का सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। नागरिकों को त्वरित और सुदृढ़ स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से बीएमसी की सार्वजनिक स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष हरीश भांदिर्गे ने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस महत्वपूर्ण बैठक में मानसून के दौरान होने वाली बीमारियों जैसे मलेरिया, डेंगू, गैस्ट्रो और लेप्टोस्पायरेसिस की रोकथाम के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा की गई।
बैठक के दौरान हरीश भांदिर्गे ने बीएमसी प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि मुंबई के सभी मुख्य अस्पतालों, उपनगरीय केंद्रों और स्थानीय औषधालयों में दवाओं का पर्याप्त स्टॉक हर समय सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने चिकित्सा प्रणाली को 24 घंटे मुस्तैद रखने के साथ ही डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता पर विशेष जोर दिया। भांदिर्गे ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन संवेदनशील वार्डों या इलाकों में प्रतिवर्ष मरीजों की संख्या अधिक दर्ज की जाती है, वहां बीमारी के प्रसार को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए विशेष निगरानी और कड़े कदम उठाए जाएं। इसके अतिरिक्त, दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियों के प्रति नागरिकों को जागरूक करने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने का भी निर्णय लिया गया।
बीएमसी के सभागृह नेता गणेश खणकर, सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के उपायुक्त शरद उघडे, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रमुख अस्पतालों के निदेशक शैलेश मोहिते और कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दक्षा शाह सहित कई वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों की उपस्थिति में इस चुनौतीपूर्ण मौसम से निपटने की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। प्रशासन द्वारा दी गई प्रस्तुति में यह स्पष्ट किया गया कि मच्छरों की उत्पत्ति को रोकने के लिए फॉगिंग, चूहों का नियंत्रण और लेप्टोस्पायरेसिस से बचाव के लिए टीमें पहले ही जमीनी स्तर पर सक्रिय कर दी गई हैं। किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए अस्पतालों में अतिरिक्त बिस्तरों की व्यवस्था भी की गई है।
मानसूनी तैयारियों के अलावा, बैठक में महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े एक संवेदनशील मुद्दे पर भी विशेष ध्यान दिया गया। भांदिर्गे ने कैंसर की समय पर पहचान के लिए अनिवार्य 'मैमोग्राफी जांच' की सुविधा को बीएमसी के अधिक से अधिक अस्पतालों में सुलभ बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों से आह्वान किया कि वे महिलाओं में इस जीवन रक्षक जांच के प्रति जागरूकता बढ़ाएं, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं इस रियायती चिकित्सा सुविधा का लाभ उठा सकें। बीएमसी की ये व्यापक तैयारियां न केवल मौसमी बीमारियों से लड़ने के लिए एक सुरक्षा कवच हैं, बल्कि ये मुंबईकरों के स्वास्थ्य के प्रति प्रशासन की गंभीरता और जवाबदेही को भी प्रदर्शित करती हैं।