महाराष्ट्र जैन समाज के लिए 100 करोड़ की निधि, हुआ ऐतिहासिक एमओयू
केंद्र सरकार के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम और महाराष्ट्र जैन आर्थिक विकास महामण्डल ने शैक्षणिक व व्यावसायिक ऋण के लिए करार किया।
नई दिल्ली में महाराष्ट्र जैन आर्थिक विकास महामण्डल और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम के अधिकारियों के बीच समझौता ज्ञापन के आदान-प्रदान का दृश्य।
महाराष्ट्र के जैन समाज के आर्थिक उत्थान की दिशा में आज एक अत्यंत महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है। नई दिल्ली में आयोजित एक आधिकारिक कार्यक्रम में महाराष्ट्र जैन आर्थिक विकास महामण्डल और भारत सरकार के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम के मध्य एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस महत्वपूर्ण करार के तहत केंद्र सरकार के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम द्वारा महाराष्ट्र राज्य के जैन समाज के लिए 100 करोड़ रुपए की निधि उपलब्ध कराई जाएगी।
यह वित्तीय सहायता विशेष रूप से राज्य के जैन समाज के कल्याण और प्रगति के लिए समर्पित होगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस 100 करोड़ रुपए की निधि का प्राथमिक उपयोग शैक्षणिक ऋण (एजुकेशनल लोन) और व्यावसायिक ऋण (बिजनेस लोन) प्रदान करने के लिए किया जाएगा, जिससे युवाओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने और उद्यमियों को अपना व्यवसाय स्थापित करने अथवा विस्तार देने में संबल प्राप्त होगा।
इस गरिमामयी अवसर पर नई दिल्ली स्थित आधिकारिक स्थल पर दोनों विभागों के उच्चाधिकारियों की उपस्थिति में MOU निष्पादित किया गया। इस करार के दौरान महाराष्ट्र जैन आर्थिक विकास महामण्डल का प्रतिनिधित्व करते हुए अध्यक्ष ललित गांधी, संदीप भंडारी एवं विकास आच्छा विशेष रूप से उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि इस वित्तीय समझौते को धरातल पर उतारने के लिए पिछले काफी समय से अल्पसंख्यक विभाग के समर्पित कार्यकर्ताओं द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे थे, जिन्हें आज इस महत्वपूर्ण सफलता के साथ सार्थक परिणाम मिले हैं। यह निधि महाराष्ट्र के जैन समाज के आर्थिक सशक्तीकरण में एक नई ऊर्जा का संचार करेगी और विकास के नए द्वार खोलेगी।