नवी मुंबई में गणेशोत्सव के दौरान पर्यावरण संरक्षण को लेकर महानगर पालिका ने इस वर्ष 170 कृत्रिम विसर्जन तालाब तैयार किए हैं। प्राकृतिक झीलों, नदियों और तालाबों को विसर्जन से होने वाले प्रदूषण से बचाने के साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा और विसर्जन स्थलों पर भीड़ को नियंत्रित करना इसका उद्देश्य है।

पिछले वर्ष की तुलना में इस बार कृत्रिम विसर्जन तालाबों की संख्या बढ़ाई गई है। प्रशासन की योजना है कि नागरिकों को गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए अपने घरों से दूर नहीं जाना पड़े। नवी मुंबई के सभी प्रमुख इलाकों में कृत्रिम तालाब बनाए गए हैं और इनके निर्माण का काम अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

महानगर पालिका क्षेत्र में बेलापुर में 22, नेरुल में 29, वाशी में 16, तुर्भे में 21, कोपरखैरने में 16, घणसोली में 16, ऐरोली में 25 और दिघा में 25 कृत्रिम विसर्जन तालाब तैयार किए गए हैं। इस तरह शहर में कुल 170 कृत्रिम तालाबों की व्यवस्था की गई है।

अदालत और स्थानीय प्रशासन ने सभी नागरिकों से पर्यावरण की सुरक्षा के लिए अपनी छोटी और बड़ी गणेश मूर्तियों का विसर्जन कृत्रिम तालाबों में ही करने की अपील की है। नगर निगम अधिकारियों ने भी लोगों से घर के पास बनाए गए सुविधाजनक तालाब का उपयोग करने का आग्रह किया है।

प्रशासन के अनुसार, कृत्रिम तालाबों में विसर्जन करने से विसर्जन स्थलों पर अनावश्यक भीड़ और भगदड़ की स्थिति से बचने में मदद मिलेगी। इससे श्रद्धालु शांति, श्रद्धा और सुरक्षा के साथ गणेश प्रतिमाओं को विदाई दे सकेंगे। नवी मुंबई में बनाए गए 170 कृत्रिम विसर्जन तालाब इसी व्यवस्था को सुचारु बनाने की दिशा में प्रशासन की प्रमुख पहल हैं।

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