समायिक दिवस पर महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल में धर्माराधना, साध्वीश्री के प्रवचन से मिला आत्मचिंतन का संदेश
मुंबई के कालबादेवी स्थित महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल में पर्युषण महापर्व के समायिक दिवस पर श्रावक-श्राविकाओं ने धर्माराधना की। साध्वीश्री के प्रवचन में समता, संयम और क्रोध के शमन का संदेश दिया गया।
तस्वीर में महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल, कालबादेवी के 'आचार्य तुलसी सभागृह' में पर्युषण महापर्व के अवसर पर साध्वीवृंद और श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित नजर आ रहे हैं।
मुंबई। पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के तृतीय दिवस समायिक दिवस के अवसर पर महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल, कालबादेवी में धर्माराधना, साधना और आत्मचिंतन का वातावरण रहा। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उपस्थित होकर साध्वीश्री के प्रवचन का श्रवण किया और समायिक के माध्यम से आत्मनिरीक्षण एवं आध्यात्मिक साधना की।
कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ युवक परिषद दक्षिण मुंबई की ओर से मंगलाचरण के साथ हुआ। मंगलाचरण के बाद वातावरण भक्तिमय और आध्यात्मिक हो गया। समायिक दिवस के महत्व को समझते हुए उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने निर्धारित समय में समायिक साधना की। इस दौरान आत्मनिरीक्षण, संयम और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में साधना की गई।
समायिक दिवस पर साध्वीश्री ने अपने प्रवचन में समायिक के आध्यात्मिक महत्व और जीवन में इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। शासनश्री साध्वी कंचनप्रभा ने संविधान को ससम्मान व्याख्यायित किया और स्वयं के जीवन को सौभाग्यशाली माना कि जैन शासन का गौरव एक गुरु के नेतृत्व में चरित्र की परिपालना है।
उन्होंने कहा कि पर्युषण महापर्व के उपलक्ष्य में आज समायिक दिवस है। समायिक अनुष्ठान में समर्पित श्रावक एक मुहूर्त के लिए मुनि जैसा जीवन जीता है और सांसारिक कामों से उपरत हो जाता है। साध्वीश्री ने ठाणं सूत्र के आधार पर अच्छेरों का वर्णन सुनाया, जो पूरे समाज के लिए विशिष्ट रहा।
शासनश्री साध्वी मंजुरेखा ने कहा कि सामायिक यानी समता को प्रतिष्ठित करना है। उन्होंने कहा कि समता के बिना परिवार और समाज नहीं चल सकता, यह शाश्वत सत्य है। व्यक्तिगत जीवन में भी समता बहुत जरूरी है। आज जितने भी अपराध हो रहे हैं, वे ईगो के कारण बढ़ते क्रोध से जुड़े हैं और क्रोध इंसान की जिंदगी बिगाड़ देता है। जरूरी है कि क्रोध का शमन किया जाए।
साध्वी मंजूरेखा, उदितप्रभा, निर्भयप्रभा और चेलनाश्री ने मधुर गीत की प्रस्तुति देकर वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। साध्वी चेलनाश्री ने समायिक दिवस के उपलक्ष्य में सुंदर प्रस्तुति दी। आयोजन का संयोजन शासनश्री साध्वी मंजूरेखाजी ने किया।
समायिक दिवस का आयोजन उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए आत्मचिंतन, संयम और साधना की प्रेरणा लेकर आया। पर्युषण महापर्व के इन पावन दिनों में धर्माराधना के प्रति बढ़ता उत्साह और बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं की सहभागिता तेरापंथ समाज की आध्यात्मिक जागरूकता एवं सामूहिक साधना का उदाहरण बनी।
अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद से राष्ट्रीय सहमंत्री अंकुर लुणीया, प्रकाशन प्रभारी महेश परमार तथा ज़ोनल कॉर्डिनेटर कमलेश भंसाली की विशेष उपस्थिति रही। आचार्य महाप्रज्ञ विद्यानिधि फाउंडेशन, श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, तेरापंथ युवक परिषद, तेरापंथ महिला मंडल तथा अणुव्रत समिति दक्षिण के पदाधिकारियों सहित सभी सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
यह जानकारी दक्षिण मुंबई सभा मीडिया प्रभारी नितेश धाकड़ एवं तेरापंथ युवक परिषद दक्षिण मुंबई उपाध्यक्ष दर्शन डागलिया ने दी।