तस्वीर में डोंबिवली में आयोजित पर्युषण पर्व के दौरान मंच पर बैठे उपासक अर्जुन मेड़तवाल और गेहरीलाल बाफना नजर आ रहे हैं।

मुंबई। डोंबिवली (मुंबई) में समागत उपासक द्वय अर्जुन मेड़तवाल एवं गेहरीलाल बाफना के निर्देशन में पर्वाधिराज पर्युषण की आराधना आनंद एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में जारी है। पर्युषण पर्व का तीसरा दिन सामायिक दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित विशाल धर्मसभा में सामायिक के आध्यात्मिक महत्व और जीवन में समभाव बनाए रखने की साधना पर प्रकाश डाला गया।

प्रवक्ता उपासक अर्जुन मेड़तवाल ने कहा कि जैन धर्म में सामायिक का विशेष महत्त्व बताया गया है। सामायिक समता की साधना का स्वर्णिम सोपान है और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में ऊर्ध्वारोहण करने का महत्त्वपूर्ण अनुष्ठान है। मोक्ष की मंजिल प्राप्त करने के लिए राग और द्वेष से मुक्ति आवश्यक है। सामायिक राग और द्वेष पर अंकुश लगाने का सुंदर उपक्रम है।



उन्होंने कहा कि सामायिक हर स्थिति में सम रहना सिखाती है। जीवन में कभी अनुकूल तो कभी प्रतिकूल परिस्थितियां आती हैं। कभी सुख तो कभी दुःख की स्थितियां आती हैं। इन सभी परिस्थितियों में समभाव बनाए रखने की शिक्षा सामायिक से मिलती है।

सहयोगी उपासक गेहरीलाल बाफना ने कहा कि सामायिक जैन परंपरा का अत्यंत उपयोगी उपक्रम है। उन्होंने भगवान महावीर के परम भक्त पूणिया श्रावक के कथानक के माध्यम से सामायिक की महत्ता का प्रतिपादन किया। साथ ही उन्होंने सामायिक के 32 दोषों के बारे में जानकारी दी और सुंदर मधुर गीतिका का संगान किया।

कार्यक्रम में तेयुप अध्यक्ष बिपिन मेहता, मंत्री भावेश जैन एवं उनकी टीम ने मंगलाचरण किया। डोंबिवली में पर्युषण पर्व के तीसरे दिन सामायिक दिवस के आयोजन के माध्यम से समता की साधना, राग-द्वेष पर नियंत्रण और सुख-दुःख की परिस्थितियों में समभाव बनाए रखने के संदेश को प्रमुखता से रखा गया।

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