तस्वीर में साध्वी निर्वाणश्री ठाणा-6 और अन्य साध्वियां चेम्बूर में पर्युषण महापर्व के अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करती हुई नजर आ रही हैं।

मुंबई। साध्वी निर्वाणश्री ठाणा-6 के पावन सान्निध्य में पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन की आराधना ‘सामायिक दिवस’ के रूप में की गई। चेम्बूर में आयोजित कार्यक्रम में विशाल श्रावक समाज की उपस्थिति रही।

साध्वी निर्वाणश्री ने संबोधित करते हुए कहा कि भगवान महावीर के जीव की भवांतर यात्रा में एक विशेषता रही है। मरीचि के जन्म में उन्होंने तापसी दीक्षा ग्रहण की, जो भवांतर में भी संयासी के रूप में चलती रही। कभी तापस, कभी परिव्राजक और कभी संन्यासी के रूप में उनकी यात्रा आगे बढ़ी। ऊर्ध्वारोहण के लिए अग्रिम जन्मों में उन्होंने महाव्रत दीक्षा ग्रहण की।



उन्होंने कहा कि समता और विषमता, करुणा और क्रूरता ऐसे दो ध्रुव हैं, जिन्हें एक साथ नहीं देखा जा सकता। भगवान महावीर ने समता और करुणा का संदेश दिया, क्योंकि विषमता और क्रूरता चेतना को भटकाती है। समता और करुणा से आत्मा का कल्याण होता है। पर्युषण महापर्व समता की प्रतिष्ठा का पर्व है।

साध्वी योगक्षेमप्रभा ने अपने प्रभावी वक्तव्य में भगवान शांतिनाथ के आत्मविकास की यात्रा की विवेचना की। उन्होंने सोलहवें तीर्थंकर और पांचवें चक्रवर्ती भगवान शांतिनाथ की प्रेरणादायी अध्यात्मयात्रा की सारगर्भित प्रस्तुति दी।

साध्वी मुदितप्रभा ने सामायिक दिवस की महत्ता प्रतिपादित करते हुए सामायिक के विभिन्न बिंदुओं को विस्तार से समझाया। साध्वी कुंदनयशा ने सामायिक गीत का संगान किया। मुख्य प्रवचन से पूर्व तेयुप द्वारा ‘अभिनव सामायिक’ का उपक्रम संपादित किया गया। साध्वी कुंदनयशा ने जप-ध्यान आदि के प्रयोग करवाए।

कार्यक्रम का शुभारंभ नमस्कार महामंत्र के सस्वर जप से हुआ। कुर्ला तेरापंथ महिला मंडल की बहनों ने भगवान महावीर की स्तुति के साथ मंगलाचरण किया। सभाध्यक्ष लक्ष्मण कोठारी ने अपने उद्गार प्रकट किए। मंच संचालन महिला मंडल अध्यक्ष ममता कच्छारा ने किया। इस तरह पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन सामायिक दिवस की आराधना में समता, करुणा और आत्मकल्याण के संदेश को प्रमुखता से रखा गया।

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