सामायिक केवल क्रिया नहीं, आत्मशुद्धि और समता की साधना : मुनि मुकुल कुमार
मुंबई में पर्युषण पर्व के सामायिक दिवस पर मुनि मुकुल कुमार ने आत्मशुद्धि और समता की साधना का महत्व बताया, वहीं मुनि कुलदीप कुमार ने 27 भवों का वर्णन किया।
तस्वीर में मुनिश्री सफेद वस्त्र पहने और मुख पर पट्टी लगाए हुए मंच पर बैठकर प्रवचन दे रहे हैं।
पर्युषण पर्व के अंतर्गत सामायिक दिवस श्रद्धा, साधना और आत्मचिंतन के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुनि मुकुल कुमार ने सामायिक के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि सामायिक मात्र निर्धारित समय तक की जाने वाली धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जीवन में समता, संयम और आत्मजागरण को प्रतिष्ठित करने की साधना है। जब व्यक्ति कुछ समय के लिए बाहरी संसार से स्वयं को विराम देकर अपने भीतर उतरता है, तभी आत्मनिरीक्षण और आत्मशुद्धि की प्रक्रिया प्रारंभ होती है।
मुनि मुकुल कुमार ने कहा कि वर्तमान जीवन की आपाधापी और मानसिक तनाव के बीच सामायिक व्यक्ति को स्वयं से जुड़ने का अवसर देती है। सामायिक के माध्यम से मन की चंचलता, वाणी की असंयमता और व्यवहार की अशांति पर अंकुश लगाकर जीवन में शांति एवं संतुलन स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं को सामायिक को केवल पर्व विशेष तक सीमित न रखकर जीवन की नियमित साधना बनाने की प्रेरणा दी।
वहीं मुनि कुलदीप कुमार ने भगवान महावीर के सत्ताईस भवों की क्रमबद्ध एवं प्रेरणादायी यात्रा का वर्णन किया। उन्होंने भगवान महावीर की आध्यात्मिक यात्रा के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से कर्म-सिद्धांत, पुरुषार्थ, तप, संयम और आत्मशुद्धि की महत्ता समझाई।
उन्होंने कहा कि तीर्थंकर महावीर की जीवन-यात्रा यह संदेश देती है कि आत्मा निरंतर पुरुषार्थ के द्वारा कर्मबंधन से मुक्त होकर परम शुद्धता की ओर अग्रसर हो सकती है।
दोनों मुनिवरों के प्रेरणादायी वक्तव्य से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा एवं आत्मचिंतन की भावना से सराबोर हो उठा। श्रावक-श्राविकाओं ने सामायिक साधना के साथ धर्मसभा में प्रवचनों का लाभ लिया। कार्यक्रम का मंगलाचरण ज्ञानशाला की प्रशिक्षिकाओं ने किया।