बचत गटों के फंड पर BMC स्थायी समिति में हंगामा, 3 साल से केंद्र का अनुदान बंद
मुंबई BMC स्थायी समिति में महिला बचत गटों के फंड पर हंगामा हुआ। केंद्र से 3 साल से अनुदान न मिलने पर बीएमसी देगी 25 हजार रुपये।
मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की स्थायी समिति की बैठक में राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत महिला बचत गटों को मिलने वाले केंद्रीय अनुदान का मुद्दा गरमा गया। पिछले तीन साल से केंद्र सरकार की ओर से अनुदान नहीं मिलने के कारण बीएमसी को अपने खजाने से साढ़े पांच करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। इस मुद्दे पर विपक्षी नेताओं ने बीएमसी प्रशासन पर निशाना साधते हुए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का आर्थिक बोझ महानगरपालिका पर डालने का विरोध किया।
बैठक में हुई तीखी बहस और हंगामे के बीच करीब ढाई हजार महिला बचत गटों को बीएमसी के फंड से सहायता राशि देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। बीएमसी प्रशासन ने महिलाओं के काम को जारी रखने के लिए अपने महिला कल्याण फंड से प्रत्येक बचत गट को 25 हजार रुपये देने की योजना बनाई है।
विपक्षी नगरसेवकों ने सहायता राशि देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं होने के साथ ही बीएमसी के पास पैसों की कमी का मुद्दा भी उठाया। इसके जवाब में बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त बिपिन शर्मा ने स्पष्ट किया कि सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं है। साथ ही केंद्र सरकार से फंड प्राप्त होते ही बीएमसी की ओर से किए गए इस खर्च को वापस समायोजित कर लिया जाएगा।
बैठक के दौरान राज्य सरकार की लाडली बहना योजना को लेकर भी सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विपक्षी सदस्यों ने योजना को लेकर सवाल उठाए, जबकि सत्ताधारी पक्ष के नेताओं ने इसका जोरदार विरोध किया। इस दौरान कुछ देर तक स्थायी समिति की बैठक में हंगामे की स्थिति बनी रही।
हंगामे के बाद विपक्षी नेता प्रभाकर शिंदे द्वारा महिला बचत गटों को आर्थिक मदद देने के लिए पेश किया गया प्रस्ताव स्थायी समिति ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया। इस फैसले के साथ ढाई हजार महिला बचत गटों को फिलहाल बीएमसी के महिला कल्याण फंड से सहायता मिलने का रास्ता साफ हो गया है, जबकि केंद्र से पिछले तीन साल से लंबित अनुदान का मुद्दा बैठक में प्रमुख प्रशासनिक चिंता के रूप में सामने आया।