नकली जाति प्रमाण पत्र मामले में विशाखा राउत को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, सीट पर बड़ा आदेश
विशाखा राउत के नकली जाति प्रमाण पत्र मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल राहत देने से इनकार किया। मुंबई हाईकोर्ट के आदेश पर रोक नहीं लगी, लेकिन अंतिम फैसले तक खाली नगरसेवक सीट पर नई नियुक्ति पर रोक रहेगी।
मुंबई। उद्धव ठाकरे गुट की नेता और मुंबई की पूर्व महापौर विशाखा राउत को नकली जाति प्रमाण पत्र से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। मुंबई उच्च न्यायालय ने इससे पहले उनका नगरसेवक पद रद्द करने का फैसला सुनाया था, जिसके खिलाफ विशाखा राउत ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अदालत ने मुंबई उच्च न्यायालय के आदेश और जाति प्रमाण पत्र रद्द किए जाने के फैसले पर तत्काल रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया। ऐसे में विशाखा राउत की नगरसेवक सीट पर लगी रोक फिलहाल जारी रहेगी और उन्हें तत्काल कोई बड़ी राहत नहीं मिली है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। अदालत ने आदेश दिया कि जब तक मामले की पूरी जांच और अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक विशाखा राउत की खाली हुई नगरसेवक सीट पर किसी नए व्यक्ति को नहीं बिठाया जाएगा। इससे पहले विपक्षी दल की नेता इस सीट पर दावा कर रही थीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद उस प्रक्रिया पर रोक लग गई है।
अब मामले की अगली बड़ी सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी। इसी दिन अदालत आगे की कार्रवाई को लेकर फैसला करेगी। तब तक विशाखा राउत की नगरसेवक सीट और नकली जाति प्रमाण पत्र से जुड़े इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के अंतिम रुख पर नजर रहेगी।