भारतेंदु समिति के 100 वर्ष पूरे, दिल्ली से तेलंगाना तक 21 साहित्यकार सम्मानित
कोटा में श्री भारतेंदु समिति के शताब्दी समारोह में भारतेंदु हरिश्चंद्र की 176वीं जयंती मनाई गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने साहित्य की भूमिका बताई और दिल्ली से तेलंगाना तक 21 साहित्यकारों को सम्मानित किया।
तस्वीर में कोटा के माहेश्वरी भवन में आयोजित श्री भारतेंदु समिति के शताब्दी समारोह और साहित्यकार सम्मान समारोह के दौरान सम्मानित होने वाले साहित्यकार नजर आ रहे हैं।
कोटा में हाड़ौती संभाग की प्रमुख साहित्यिक संस्था श्री भारतेंदु समिति ने अपने शताब्दी वर्ष के अवसर पर साहित्यकार सम्मान समारोह आयोजित किया। समारोह में आधुनिक हिंदी भाषा के युग प्रवर्तक भारतेंदु हरिश्चंद्र की 176वीं जयंती भी मनाई गई। श्री माहेश्वरी भवन में आयोजित समारोह में मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे को ‘हनुमान प्रसाद सक्सेना हिंदी सम्मान’ तथा राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित कोटा की सुश्री आस्था सक्सेना को ‘स्वर सुधा श्री सम्मान’ प्रदान किया गया। इनके अलावा 19 साहित्यकारों को साहित्यश्री सम्मान से नवाजा गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में संस्कार, संवेदना और राष्ट्रीय चेतना का संचार करते हैं। उन्होंने कहा कि उनका खाली समय साहित्य और कविता पढ़ने में व्यतीत होता है। बिरला ने बताया कि कोटा में शीघ्र ही पुस्तक मेले और साहित्यकारों का विशाल कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि साहित्य और कविता अलग-अलग भाषाओं एवं संस्कृतियों के लोगों को आपस में जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
संस्था के 100 वर्ष पूर्ण होने पर ओम बिरला ने इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि और मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि संस्था लंबे समय से साहित्य के उत्थान और साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के लिए कार्य कर रही है। बहुभाषी और विविध संस्कृतियों वाले देश में साहित्य और कविता के प्रति प्रेम ही लोगों को एक-दूसरे की भाषा और संस्कृति से जोड़ता है।
इससे पूर्व सुबह भारतेंदु भवन, लाड़पुरा में भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। सहकार नेता राजेश कृष्ण बिरला की अगुवाई में हुए कार्यक्रम में साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ-साथ उसे दिशा देने वाला माध्यम होने की बात रखते हुए भारतेंदु हरिश्चंद्र को याद किया गया। सम्मान समारोह का संचालन संयोजक, कवि एवं वरिष्ठ साहित्यकार रामेश्वर शर्मा ‘रामू भैया’ ने किया। अंत में सचिव सुनील जायसवाल ने आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम समन्वयक एवं रेडक्रॉस के स्टेट प्रसिडेंट राजेश कृष्ण बिरला ने कहा कि वर्ष 1926 में गठित यह संस्था आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुकी है। संस्था से जुड़े साहित्यकारों ने देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई है। शताब्दी समारोह के अवसर पर दिल्ली से तेलंगाना तक के साहित्यकारों को एक मंच पर लाकर सम्मानित किया गया।
राजेश कृष्ण बिरला ने कहा कि संस्था ने 100 वर्षों में हजारों साहित्यकारों को सम्मानित और प्रोत्साहित करते हुए उन्हें साहित्य सृजन के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र हिंदी साहित्य के पितामह व हिंदी में आधुनिकता के पहले रचनाकार रहे हैं। भारतेंदु हरिश्चंद्र ने रीतिकाल की विकृत सामन्ती संस्कृति की पोषक वृत्तियों को छोड़कर स्वस्थ परंपरा की भूमि अपनाई और नवीनता के बीज बोए। ‘निज भाषा उन्नति अहै...’ का जो मंत्र भारतेंदु हरिश्चंद्र ने दिया, वह अब मूर्त रूप ले रहा है।
इस अवसर पर नवल किशोर गर्ग ने कहा कि हिंदी आज केवल देश में ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर भी अपनी पहचान बना रही है। ऐसे में हिंदी के प्रति सम्मान और गौरव की भावना को मजबूत करने के साथ साहित्यकारों को उचित मंच और प्रोत्साहन देना समय की आवश्यकता है। वरिष्ठ भाजपा नेता पंकज मेहता ने कहा कि नई पीढ़ी में हिंदी के प्रति गौरव का भाव विकसित करने के साथ साहित्यकारों और रचनाकारों को प्रोत्साहित करना आवश्यक है।
साहित्य सम्मान समारोह में डॉ. मोहनलाल साह (कोटा), डॉ. मंजू महिमा (अहमदाबाद), जगदीश प्रसाद (दौसा), श्यामा शर्मा (कोटा), अनुराधा अनुज्ञा (कोटा), बाबू बंजारा (कोटा), श्री ज्ञानचंद मर्मज्ञ (बेंगलुरु), हेमेन्द्र सिंह पुरोहित (कोटा), राधेश्याम शर्मा (कोटा), संजू शृंगी (कोटा), प्रभात सिंघल (कोटा), कर्नल प्रवीण त्रिपाठी (दिल्ली), विजय शर्मा (कोटा), रामगोपाल गौतम (कोटा), शैलजा विजय (कोटा), डॉ. कमल बाला (तेलंगाना), श्री दयाल परमार (छबड़ा), नीलाक्षी श्रीवास्तव (कोटा) और प्रशांत तेलियानी (कोटा) को साहित्यश्री सम्मान से सम्मानित किया गया। प्रशांत तेलियानी को साहित्यश्री सम्मान के तहत मोमेंटो, प्रशस्ति पत्र, माला व शॉल देकर नवाजा गया।
झालावाड़ रोड स्थित माहेश्वरी भवन में आयोजित साहित्य सम्मान समारोह में उपाध्यक्ष महेशचंद अजमेर, महामंत्री सुनील जयसवाल, अर्थमंत्री राजेन्द्र शारदा, साहित्य मंत्री प्रदीप सक्सेना, प्रचार मंत्री गोपाल सोमानी, प्रबंधकीय मंत्री गोपाल शारदा, शिक्षा एवं पुस्तकालय मंत्री उमेश कुमार गांधी, पंकज जयसवाल, राजेन्द्र कुमार जैन, सुरेश चंद काबरा, के जी जाखेटिया, प्रमोद भण्डारी, रवि कुमार झंवर, राजीव मेवाडा, महेन्द्र खण्डेलवाल, महेन्द्र कुमार और निजामुद्दीन बबलू उपस्थित रहे। संस्था के शताब्दी वर्ष का यह आयोजन साहित्य सेवा के 100 वर्षों की यात्रा और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े साहित्यकारों के सम्मान का अवसर बना।