चार देशों की आध्यात्मिक यात्रा के तहत जांबिया में श्रीमद् भागवत कथा का वाचन करने जा रहे संत दिग्विजय राम, जहां वह भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करेंगे।   

अफ्रीकी महाद्वीप के जनजातीय देश जांबिया की राजधानी लुसाका में 24 अप्रैल से 30 अप्रैल तक रामनाम की गूंज सुनाई देगी। रामस्नेही संप्रदाय के संत दिग्विजय राम के सान्निध्य में यहां सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा। इस धार्मिक आयोजन के माध्यम से विदेशी धरती पर भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार होगा। कथा को लेकर जांबिया में रह रहे प्रवासी भारतीयों में उत्साह देखा जा रहा है।

संत दिग्विजय राम 3 अप्रैल से चार देशों की आध्यात्मिक यात्रा शुरू करेंगे। इस दौरान वे ऑस्ट्रेलिया, जांबिया, जर्मनी और जापान में प्रवास कर विभिन्न धार्मिक आयोजनों और प्रवचनों के माध्यम से सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार करेंगे। यात्रा की शुरुआत 3 अप्रैल से 13 अप्रैल तक ऑस्ट्रेलिया के 11 दिवसीय आध्यात्मिक प्रवास से होगी। इसके बाद 24 अप्रैल से 30 अप्रैल तक जांबिया की राजधानी लुसाका में श्रीमद् भागवत कथा होगी।

यात्रा के अगले चरण में 21 मई से 27 मई तक स्टूड गार्ड जर्मनी (यूरोप) में भागवत प्रवचन होंगे। इसके बाद 21 जून से 27 जून तक टोक्यो (जापान) में श्रीमद् भागवत सत्संग का आयोजन किया जाएगा। इस तरह संत दिग्विजय राम की चार देशों की यात्रा के दौरान अलग-अलग स्थानों पर धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।

जांबिया में भारतीय समुदाय की मौजूदगी इस आयोजन को विशेष महत्व देती है। भारतीय विदेश मंत्रालय और लुसाका स्थित भारतीय दूतावास के आंकड़ों के अनुसार, जांबिया में भारतीय मूल के करीब 30 हजार लोग निवास करते हैं। इनमें लगभग 25 हजार ऐसे लोग हैं, जो लंबे समय से वहां बसे हुए हैं और जांबिया या अन्य देशों की नागरिकता ले चुके हैं। इस समुदाय का एक बड़ा हिस्सा गुजरात से ताल्लुक रखता है। इसके अलावा, करीब 5 हजार भारतीय नागरिक वर्तमान में जांबिया में व्यापार, खनन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

जांबिया में भारतीय समुदाय मुख्य रूप से लुसाका और चिपटा शहरों में केंद्रित है। देश में 72 से अधिक जनजातियां हैं। यहां की लगभग 90 प्रतिशत आबादी नौ बड़े जातीय समूहों से जुड़ी है, जिनमें बेम्बा सबसे बड़ा समूह है। ऐसे में लुसाका में होने वाली श्रीमद् भागवत कथा धार्मिक आयोजन के साथ भारतीय समुदाय की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का भी प्रमुख अवसर होगी।

इस कथा के मुख्य प्रायोजक मूल रूप से राजसमंद जिले के निवासी विजयवर्गीय परिवार होंगे। विजयवर्गीय ने बताया कि एचएसटी के संस्थापक स्वामी कृष्णानंद के सान्निध्य में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर प्रवासी भारतीयों में अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है। 24 अप्रैल से शुरू होकर 30 अप्रैल तक चलने वाली यह कथा संत दिग्विजय राम की चार देशों की आध्यात्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव होगी।

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