पुनावली गांव में पारंपरिक पोशाक पहने सामूहिक करवा चौथ पूजा में बैठी महिलाएं दिख रही हैं।

बड़ी सादड़ी। निकुंभ कस्बे सहित समीपस्थ ग्राम पुनावली में सुहागिन महिलाओं ने करवा चौथ का पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों और उल्लासपूर्ण माहौल में सामूहिक रूप से मनाया। महिलाओं ने पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना करते हुए व्रत रखा और विधि-विधान से चौथ माता की पूजा-अर्चना की।

पुनावली महिला मंडल प्रमुख गायत्री पुष्करना ने बताया कि गांव में वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार लक्ष्मी नारायण मंदिर के पास मोहल्ले की सभी महिलाएं राधेश्याम शर्मा के निजी आवास पर एकत्रित हुईं। यहां महिलाओं ने चौथ माता के व्रत की कथा सुनी। इसके बाद उगते हुए चंद्रमा की पूजा-अर्चना कर जल का अर्घ्य अर्पित किया।

सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु की कामना करते हुए व्रत रखा। पूजा के बाद महिलाएं अपने घर पहुंचीं और पति के हाथों मिठाई के रूप में चौथ माता का प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पालन किया।

महेश चंद्र पुष्करणा ने बताया कि महिला मंडल की सदस्य डाडम देवी, कमला देवी, इंदिरा बाई, मंजू देवी एवं मांगी बाई शर्मा ने व्रत कथा और पूजा-अर्चना संपन्न करवाने में पूर्ण सहयोग किया।

वहीं, निकुंभ कस्बे में भी करवा चौथ का पर्व उत्साह के साथ मनाया गया। हालांकि, बीती रात्रि 9 बजे तक आसमान में बादल छाए रहने के कारण महिलाओं को चंद्र देव के दर्शन नहीं हो सके। रात 9.13 बजे घने बादलों की ओट से चंद्रमा की हल्की झलक दिखाई दी। इसके बाद महिलाओं ने खुशनुमा माहौल में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित कर अपने सुहाग की लंबी उम्र तथा घर-परिवार में खुशहाली की मन्नत मांगी।

आशीर्वाद हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी अशोक दास वैष्णव ने बताया कि धार्मिक दृष्टि से इस व्रत का प्राचीन स्वरूप करक चतुर्थी या करक व्रत माना जाता है। यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को किया जाता है। बाद में यही लोक परंपरा करवा चौथ के नाम से प्रसिद्ध हुई। इस दिन महिलाएं निर्जल उपवास रखती हैं, चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करती हैं और अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। निकुंभ और पुनावली में परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ हुए सामूहिक आयोजन में करवा चौथ की धार्मिक मान्यताओं और पारिवारिक परंपराओं की झलक देखने को मिली।

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