नई अफीम नीति पर किसानों का आक्रोश, 4.4 मार्फिन की शर्त और सीपीएस नियमों में संशोधन की मांग
नई अफीम नीति में 4.4 मार्फिन की शर्त और सीपीएस पद्धति के प्रावधानों से अफीम किसानों में नाराजगी बढ़ी। चित्तौड़गढ़ में धरना और ग्वालियर में नारकोटिक्स आयुक्त से मुलाकात के बाद किसानों ने कई मांगें उठाकर नीति में संशोधन की मांग की।
नई अफीम नीति के विरोध में चित्तौड़गढ़ में प्रदर्शन करते किसान।
चित्तौड़गढ़ में नई अफीम नीति को लेकर किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अफीम किसान संघर्ष समिति और भारतीय किसान संघ ने नीति में संशोधन की मांग उठाते हुए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के नाम ज्ञापन सौंपे हैं। किसानों ने 4.4 प्रतिशत मार्फिन की शर्त, सीपीएस पद्धति में पट्टे जारी करने और डोडा देने की निर्धारित सीमा सहित कई प्रावधानों पर आपत्ति जताई है। चित्तौड़गढ़ में किसानों ने कलेक्ट्रेट चौराहे पर धरना देकर आंदोलन की चेतावनी दी, वहीं भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधिमंडल ने ग्वालियर में नारकोटिक्स आयुक्त दिनेश बिसेन से मुलाकात कर किसानों की समस्याएं रखीं।
अफीम किसान संघर्ष समिति के बैनर तले किसानों ने जिला कलेक्टर और सांसद को वित्तमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। किसानों ने बताया कि भारत सरकार की नई अफीम नीति में वर्ष 1998 से 2002 के दौरान कटे हुए पट्टों को राहत देने और पुनः बहाल करने के निर्णय के लिए सरकार का आभार जताया है। हालांकि, उनका कहना है कि वर्तमान पट्टाधारी किसानों की उम्मीदों और हितों को नीति में पूरी तरह नजरंदाज किया गया है। चुनावी वर्ष में इस नीति को लेकर अफीम किसानों में आक्रोश व्याप्त है। किसानों ने इसे देखते हुए नीति में संशोधन को जरूरी बताया।
समिति के धूले सिंह राव ने बताया कि वर्ष 2026-27 में अकाल वर्ष और मौसम की मार के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं। ऐसे में किसानों के लिए औसत प्रदान करना काफी मुश्किल रहा। किसानों ने औसत भरने के बाद भी मार्फिन मार गई। इसके बावजूद किसानों को सरकार से उम्मीद थी कि नई अफीम नीति में राहत प्रदान की जाएगी और 3.7 की मार्फिन औसत पर पट्टा दिया जाएगा।
किसानों ने बताया कि प्रतिवर्ष 4.00 मार्फिन से पट्टा गम पद्धति में जारी किए जा रहे थे, लेकिन इस वर्ष औसत मार्फिन बढ़ाकर 4.4 प्रतिशत से नीचे सीपीएस के पट्टे देने की घोषणा की गई है। इससे कई किसानों को सीपीएस पद्धति में जाना पड़ेगा। किसानों ने नीति में बदलाव की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट चौराहे पर धरना दिया और आंदोलन की चेतावनी दी।
इधर, भारतीय किसान संघ अफीम आयाम के राजस्थान प्रदेश प्रमुख बद्रीलाल जाट के नेतृत्व में 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने ग्वालियर में नारकोटिक्स आयुक्त दिनेश बिसेन से संवाद किया। प्रतिनिधिमंडल ने नई अफीम नीति में पुनः संशोधन की मांग करते हुए दिल्ली मंत्रालय में बातचीत कर किसानों के साथ न्याय करने के लिए ज्ञापन सौंपा।
अफीम आयाम चित्तौड़ प्रांत टीम सदस्य सोहन लाल आंजना ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने नारकोटिक्स आयुक्त के समक्ष किसानों की कई समस्याओं पर चर्चा की। किसानों ने हाल ही में जारी नई नीति में संशोधन कर 4.0 मार्फिन पर सभी किसानों को अफीम गोंद निकालने की अनुमति देने की मांग की। साथ ही, प्रति 10 आरी पर 90 किलो से अधिक सीपीएस पद्धति में डोडा देने वाले किसानों को पूर्व की भांति अफीम गोंद निकालने के लिए लुवाई-चिराई के पट्टे जारी करने की मांग रखी।
किसान संघ ने कहा कि नई अफीम नीति में 4.4 मार्फिन से पट्टे जारी करना और सीपीएस में 90 किलो से अधिक डोडा देने वाले किसानों को भी लुवाई-चिराई के पट्टों से वंचित रखना किसानों के साथ धोखा है। इस नीति से किसान पूरी तरह नाराज हैं। अफीम क्षेत्र के जिलों में नाराज और आहत किसान लगातार आंदोलन कर नीति में सुधार की मांग कर रहे हैं। किसान संघ ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से बातचीत कर नीति में अविलंब संशोधन करने की मांग की।
नारकोटिक्स आयुक्त दिनेश बिसेन से वार्ता के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कई अतिरिक्त बिंदुओं पर भी गंभीरता से चर्चा की। इनमें कच्चे तोल की समस्या पूरी तरह समाप्त करना, अफीम की फसल की बुवाई के बाद उस क्षेत्रफल के अंदर कहीं भी अफीम खराब होने पर उसे उखड़वाना, जीवित नामांतरण प्रारंभ करवाना और भविष्य में समान आरी के ही पट्टे सभी किसानों को दिए जाने की मांग शामिल रही।
इसके अलावा, वर्ष 1990 से कटे हुए सभी पट्टे बहाल करने, रोजगार देने के लिए दो लाख नए किसानों को पट्टे जारी करने, डोडा चूरा को पूरी तरह एनडीपीएस की धाराओं से बाहर निकालने और अफीम किसानों पर 8/18, 8/29 और 8/15 का प्रभाव किसी भी प्रकार से नहीं रहने देने जैसे गंभीर विषयों पर भी चर्चा कर समाधान की मांग की गई।
नारकोटिक्स आयुक्त दिनेश बिसेन ने कहा कि उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाली मांगों पर किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए सुधार करवाया जाएगा। मंत्रालय स्तर के विषयों को मंत्रालय को भेजकर किसानों को राहत दिलाने के प्रयास किए जाएंगे।
ग्वालियर में भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधिमंडल में शिवराज पुरी, बद्रीलाल तेली, लाभ चंद धाकड़, भूरालाल धाकड़, गोविंद धाकड़, गीतालाल धाकड़, भगवान लाल धाकड़ और गोपाल लाल साहू शामिल थे।
नई अफीम नीति में संशोधन की मांग को लेकर चित्तौड़गढ़ सहित अफीम उत्पादक जिलों में किसानों की नाराजगी सामने आ रही है। किसान संघ और संघर्ष समिति की ओर से उठाए गए मुद्दों पर अब मंत्रालय स्तर पर निर्णय और नीति में संभावित बदलाव को लेकर किसानों की निगाहें टिकी हैं।