बारां के डोल मेला रंगमंच पर सजा अखिल भारतीय मुशायरा, शायरों ने जमाया रंग
मुशायरे में देशभर के प्रमुख शायरों ने गजल, व्यंग्य और कौमी एकता के संदेश से समां बांधा, वहीं 3 अक्टूबर को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन होगा।
तस्वीर में मंच पर माइक के सामने शायरी और गजल पेश करते हुए विभिन्न शायर।
बारां। ऐतिहासिक डोल मेला रंगमंच पर गुरुवार रात आयोजित अखिल भारतीय मुशायरे में शेर-ओ-शायरी, गजलों, व्यंग्य और कौमी एकता के संदेश ने ऐसा रंग जमाया कि श्रोता देर रात तक वाह-वाह करते रहे। जिलेभर से पहुंचे शायरी प्रेमियों ने उर्दू की मीठी जुबां में पेश किए गए कलामों का जमकर लुत्फ उठाया।
मुशायरे का शानदार संचालन शायर इस्माईल नजर ने किया। कार्यक्रम का आगाज बुरहानपुर से आए डॉ. जलीलुर्रहमान ने किया। उन्होंने शायराना अंदाज में मौजूदा राजनीति पर तंज कसते हुए, “सब गम तेरी खुशियों के लिए झेल रहा हूं, मैं हार तो गया हूं मगर खेल रहा हूं...” पेश किया। इस पर पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा।
असरार चंदेवरी ने अपने तीखे मिसरों से आज के सामाजिक और राजनीतिक हालात पर व्यंग्य कसा। दिल्ली की सरिता जैन ने अपनी गजल के जरिए श्रोताओं से खूब दाद बटोरी। उनका शेर, “एक ताजिर से हो गया था इश्क, उम्र भर मोल-भाव करता रहा...” महफिल में खासा सराहा गया।
नूर धौलपुरी ने भी अपनी शायरी के जरिए समसामयिक परिस्थितियों पर जोरदार कटाक्ष किए। वहीं नैना नसीब ने अपनी संवेदनशील गजल से महफिल को भावुक कर दिया। “देखा बिलखते बच्चों को जो भूख से मैंने, दुनिया की फिक्र छोड़ कमाने निकल गई...” जैसे मिसरों ने श्रोताओं को भीतर तक छू लिया और देर तक तालियां बजती रहीं।
मुशायरे में कौमी एकता का संदेश भी प्रमुखता से उभरा। “तेरा भगवान जैसा है, खुदा मेरा भी वैसा है, यह है काशी के जैसा और वो काबे के जैसा है...” जैसे मिसरों पर श्रोताओं ने जमकर दाद दी।
संचालक इस्माईल नजर ने भी अपने कलाम से महफिल में जोश भर दिया। “हम अपने घर को दो दिन भी नहीं चला पाते, तमाम दुनिया को कब से चला रहा है कोई...” पर पंडाल तालियों से गूंज उठा।
नासिर फ़राज़ ने अपनी शायरी में मां की महिमा का भावपूर्ण बखान किया। वहीं शउर आसना और रजा बड़नवेरी ने अपनी शायरी और उर्दू की मिठास से श्रोताओं को बांधे रखा।
स्थानीय शायर आसिफ गोरी महफिल में डायमंड की तरह चमके। उनके व्यंग्यात्मक अंदाज ने खूब रंग जमाया। “बैठा लिए हमने सपेरे अपने पास, आसिफ अब आस्तीन के सांपों की खैर हो...” पर श्रोताओं ने जमकर दाद दी।
इसके अलावा सैफुद्दीन राही, हिसामुद्दीन रजा और असलम इमाम ने भी अपने कलाम प्रस्तुत कर महफिल को ऊंचाई दी। मुशायरे की अध्यक्षता वार्ड पार्षद नफीसा असगर अली ने की।
कार्यक्रम के शुभारंभ पर डोल मेला अध्यक्ष नीरज नागर और कन्वीनर शोएब ने सभी शायरों सहित पार्षद तालिब भाई, सादिक हुसैन तथा मंचासीन अतिथियों का माल्यार्पण एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया।
डोल मेला रंगमंच मीडिया प्रभारी लक्ष्मण वर्मा सागर ने बताया कि 3 अक्टूबर शनिवार को डोल मेला रंगमंच पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। मेला अध्यक्ष नीरज नागर ने बताया कि कवि सम्मेलन में देशभर के प्रसिद्ध कवि सुरेन्द्र यादवेंद्र, अन्नू सपन, सरदार मंजीत सिंह, दिनेश देशी घी, साहिबा असर, सुनील व्यास, अपूर्व विक्रम शाह, अतुल ज्वाला, प्रेरणा ठाकरे, मनुव्रत वाजपेई, मनोज गुर्जर, अमन अक्षर, मीरां दीक्षित, भूपेंद्र राठौर और निशा मुनि गौड़ काव्य पाठ करेंगे।