बारां डोल मेला मंच पर माइक के सामने काव्य पाठ करते विभिन्न कवि।

बारां। जिला मुख्यालय पर आयोजित ऐतिहासिक डोल मेला रंगमंच पर शनिवार की रात शब्द, वीरता, हास्य और भावनाओं का ऐसा संगम देखने को मिला कि अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में श्रोता भोर तक अपने स्थानों पर डटे रहे। देशभर से आए नामचीन कवियों ने अपनी रचनाओं से कभी पंडाल में ठहाके गूंजाए तो कभी देशभक्ति और वीरता के जज्बे से श्रोताओं को रोमांचित कर दिया।

कवि सम्मेलन का संचालन इंदौर से आए अतुल ज्वाला ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. अन्नू सपन की मधुर सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद नाथद्वारा से आए हास्य कवि सुनील व्यास ने चुटीली प्रस्तुतियों से काव्य संध्या की शुरुआत की। उनकी हास्य रचनाओं पर पंडाल में जमकर ठहाके गूंजे।

भोपाल से आई साहिबा असर ने गजल और गीतों से माहौल में ऊर्जा भर दी। “शब्दों का गुलदस्ता लेकर कविता कलश उठाऊंगी, मेरे कंठ विराजो माता, गीत में तेरे गाऊंगी...” जैसी प्रस्तुति को श्रोताओं ने खूब सराहा।

चंपारण से आए अपूर्व विक्रम शाह कवि सम्मेलन के प्रमुख आकर्षण रहे। उन्होंने वीर रस में जौहर की गाथा का प्रभावी काव्य पाठ किया, जिससे पूरा पंडाल जोश से भर उठा। उनकी पंक्तियां, “रणभूमि में सजाधजा कर स्वयं भेजे अपने सुहाग को, गले लगाती है छत्राणी, जौहर वाली आग को...” पर तालियों की गड़गड़ाहट से रंगमंच गूंज उठा। उत्साहित श्रोताओं ने भारत माता के जयकारे लगाए और “वंस मोर” की आवाज से कवि का उत्साह बढ़ाया।

इसके बाद डॉ. अन्नू सपन ने गीत और गजलों से वातावरण को भावनाओं से भर दिया। “इतनी नफरत दिलों में न पाला करो, नहीं तो जिंदगी घुट-घुट कर मर जाएगी...” जैसी रचना पर उन्हें जमकर दाद मिली। गीत गणगौर की उपाधि से सम्मानित अन्नू सपन ने अपनी लंबी काव्य पारी में श्रोताओं को बांधे रखा।

हास्य रस के परमाणु बम चर्चित कवि दिनेश देसी घी ने मंच संभाला तो पंडाल ठहाकों से गूंज उठा। करीब सवा घंटे के काव्य पाठ और पैरोडी में उन्होंने हास्य के साथ तीखे व्यंग्य भी प्रस्तुत किए। उनकी रचना, “हम उस देश के वासी हैं, जिस देश में आदिवासी हैं, उन्होंने संस्कार नहीं छोड़ा, हमने अपनी मां को वृद्धाश्रम छोड़ा...” ने श्रोताओं को हंसाने के साथ सामाजिक चिंतन के लिए भी मजबूर किया। उनकी पैरोडियों और हास्य व्यंग्य पर दर्शक देर तक लोटपोट होते रहे।

सुरेंद्र यादवेंद्र ने तिरंगे की आरती करते हुए देशभक्ति का रंग घोला। “तीन रंगों के स्वाभिमान के लिए, जिएंगे-मरेंगे हिंदुस्तान के लिए...” जैसी रचना से उन्होंने आयोजन में शिखर कलश रखा। सरदार मंजीत सिंह ने भी हास्य-व्यंग्य की फुलझड़ियां छोड़ीं। “ठेकेदार के नक्शे पर पुल बनाया, कुछ अधिकारी कुछ नेता खा गया...” जैसी पंक्तियों से उन्होंने व्यवस्था पर करारे व्यंग्य किए।

मीरा दीक्षित ने श्रृंगार रस के माध्यम से कृष्ण और मीरा के प्रेम का भावपूर्ण चित्रण किया। प्रेरणा ठाकुर ने गीत और गजलों की प्रभावी प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। कवि सम्मेलन में मनुव्रत वाजपेयी, अमन अक्षर, मनोज गुर्जर, भूपेंद्र राठौर, निशामुनि गोड़, पीयूष परिंदा और शहनाज हिंदुस्तानी सहित अन्य कवियों ने भी वीर, हास्य एवं विविध रसों की रचनाओं से अपनी छाप छोड़ी।

डोल मेला रंगमंच के मीडिया प्रभारी लक्ष्मण वर्मा सागर ने बताया कि कार्यक्रम के प्रारंभ में पूर्व सभापति कमल राठौड़, उपसभापति तेजस सुमन, मेला अध्यक्ष नीरज नागर, पार्षद हितेश चंदेल, दीपक सोनी, अली असगर सहित अन्य पदाधिकारियों ने एसडीएम रामावतार, आरएस अधिकारी शिशुपाल तथा कई गणमान्य लोगों का माल्यार्पण कर स्वागत किया।

डोल मेला अध्यक्ष नीरज नागर ने बताया कि सोमवार को रंगमंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। शनिवार की रात से भोर तक चला यह कवि सम्मेलन वीर रस, हास्य, व्यंग्य, गीत और गजलों की प्रस्तुतियों के बीच श्रोताओं की लगातार मौजूदगी का साक्षी बना।

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