हापुड़ में पर्यावरण और गंगा स्वच्छता पर सख्ती, पौधों की जियोटैगिंग के लिए 2 दिन का अल्टीमेटम
जियोटैगिंग, कचरा प्रबंधन, एसटीपी और ईटीपी जांच में देरी पर जिला प्रशासन ने जताई नाराजगी, दिए सख्त निर्देश।
हापुड़ कलेक्ट्रेट सभागार में पर्यावरण समिति की बैठक में अधिकारी समीक्षा करते दिख रहे हैं।
हापुड़ (उत्तर प्रदेश)। हापुड़ में पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और गंगा स्वच्छता से जुड़े कार्यों में लापरवाही पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी के निर्देशन में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला पर्यावरण समिति, जिला वृक्षारोपण समिति और जिला गंगा समिति की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में दोपहर 1:00 बजे शुरू हुई बैठक में पर्यावरण व्यवस्था, पौधारोपण और नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने से जुड़े कार्यों की समीक्षा की गई। अपर जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्धारित कार्य समय पर पूरा करने के निर्देश दिए और लापरवाही बरतने वाले विभागों को सख्त चेतावनी दी।
बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी गौतम सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी शिव बिहारी शुक्ला, उप कृषि निदेशक योगेन्द्र कुमार, ईओ हापुड़ संजय कुमार, ईओ गढ़मुक्तेश्वर पवित्रा त्रिपाठी, यूपीपीसीबी के प्रतिनिधि सौरभ कुकरेती और लोक भारती के पर्यावरणविद् भारत भूषण सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
वर्ष 2026-27 के तहत जिले में कराए गए वृक्षारोपण कार्यों की समीक्षा के दौरान जिला वृक्षारोपण समिति के अध्यक्ष ने पौधों की जियोटैगिंग अधूरी होने पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन सरकारी विभागों में अभी तक जियोटैगिंग का कार्य पूरा नहीं हुआ है, वे अगले दो दिनों के भीतर इसे हर हाल में शत-प्रतिशत पूरा करें।
जिला पर्यावरण समिति की बैठक में ठोस कचरे के उचित और वैज्ञानिक निस्तारण पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट यानी नगरपालिका ठोस कचरे के प्रभावी प्रबंधन के लिए कड़े निर्देश दिए गए। इसके साथ ही हापुड़ में वायु प्रदूषण नियंत्रित करने और हवा की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से आगामी पौधारोपण अभियानों में ऐसी वृक्ष प्रजातियों को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी, जो वायु गुणवत्ता बेहतर बनाने में मददगार साबित होती हैं।
जिला गंगा समिति की बैठक में गंगा और सहायक नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और औद्योगिक इकाइयों की निगरानी को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए। जिले में स्थापित सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का संचालन सुचारू बनाए रखने के लिए जल निगम (ग्रामीण) और ईओ हापुड़ की संयुक्त टीम गठित कर निरीक्षण कराने के निर्देश दिए गए।
रामपुर रोड स्थित एसटीपी से जोड़ने के लिए क्षेत्र के सभी नालों की टैपिंग की कार्ययोजना तैयार करने और जल्द काम शुरू करने को भी कहा गया। इसके तहत नालों को एसटीपी से जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी, ताकि गंगा और सहायक नदियों में प्रदूषण रोकने से संबंधित कार्यों को गति मिल सके।
इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गाजियाबाद/हापुड़ को जनपद की सभी औद्योगिक इकाइयों में स्थापित एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) के संचालन की औचक जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। बोर्ड को जांच पूरी कर जल्द से जल्द रिपोर्ट प्रशासन को सौंपनी होगी।
संयुक्त बैठक में पौधों की जियोटैगिंग से लेकर ठोस कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण, वायु प्रदूषण नियंत्रण, एसटीपी के निरीक्षण, नालों की टैपिंग और औद्योगिक इकाइयों के ईटीपी की जांच तक विभिन्न कार्यों की निगरानी पर जोर दिया गया। प्रशासन के निर्देशों के तहत अब संबंधित विभागों को निर्धारित समयसीमा में लंबित कार्य पूरे करने और जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने की कार्रवाई करनी होगी।