तस्वीर में फतहनगर के नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में आगामी धार्मिक आयोजनों और बैठक के दौरान मौजूद ग्रामीण एवं मंदिर समिति के सदस्य दिखाई दे रहे हैं।

फतहनगर। नीलकंठ महादेव मंदिर राणेरा की पाल पर आगामी धार्मिक आयोजनों और मंदिर विकास कार्यों को लेकर बैठक आयोजित हुई। इसमें आसपास के गांवों के श्रद्धालुओं सहित मंदिर समिति के सदस्यों ने भाग लिया। बैठक में फरवरी-मार्च 2027 में होने वाले अतिमहारुद्र यज्ञ की तैयारियों को लेकर विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।

बैठक में बताया गया कि सूरजकुंड धाम के महाराज श्रीश्री 1008 अवधेशानंद जी महाराज दाता श्री के सान्निध्य में मंदिर परिसर में अतिमहारुद्र यज्ञ आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही मंदिर पर कलश एवं ध्वजदंड स्थापना कार्यक्रम भी होंगे। अतिमहारुद्र यज्ञ 25 फरवरी से 12 मार्च 2027 तक 15 दिवसीय रहेगा।

यज्ञ के लिए मंदिर परिसर में यज्ञशाला निर्माण की योजना बनाई गई। इसके लिए मंदिर परिसर के समीप तालाब क्षेत्र में मिट्टी का भराव करवाकर परिसर को समतल और व्यवस्थित करने का निर्णय लिया गया। इसका उद्देश्य यज्ञ के दौरान बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा से बचाने के लिए व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना है।

बैठक के दौरान अमावस्या के अवसर पर मंदिर का भंडार भी खोला गया। मंदिर समिति के सदस्यों की मौजूदगी में दान राशि की गणना की गई, जिसमें 1 लाख 65 हजार 608 रुपए प्राप्त हुए। समिति अध्यक्ष मांगीलाल चौबीसा ने बताया कि इस बार भंडारे से प्राप्त दान राशि अब तक की सबसे बड़ी राशि है। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि के अवसर पर 1 लाख 38 हजार रुपए की दान राशि प्राप्त हुई थी। उन्होंने कहा कि नीलकंठ महादेव मंदिर के प्रति शिवभक्तों की गहरी आस्था एवं श्रद्धा जुड़ी हुई है।

मंदिर परिसर में दीपक उद्यापन की प्रसादी का आयोजन भी किया गया। इस अवसर पर करीब एक क्विंटल 70 किलो मालपुए का प्रसाद तैयार किया गया। आसपास के गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की।

अतिमहारुद्र यज्ञ की तैयारियों को लेकर अगली बैठक 20 सितंबर को सुबह 9 बजे आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इसमें आयोजन की व्यवस्थाओं, यज्ञशाला निर्माण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं सहित विभिन्न तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

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