तस्वीर में दिख रही ओवरलोड जीप की छत पर और पीछे लोग बैठे हैं।

खेरवाड़ा क्षेत्र में इन दिनों यातायात व्यवस्था अव्यवस्थित नजर आ रही है। जिप टैक्सियों में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने के साथ ही यात्रियों को पीछे लटकाकर और ऊपर बैठाकर सफर कराया जा रहा है। यह स्थिति यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है।

ग्रामीण क्षेत्रों से खेरवाड़ा मुख्यालय आने-जाने वाले लोग मजबूरी में इन जिप टैक्सियों का सहारा ले रहे हैं। पर्याप्त संख्या में रोडवेज बसों का संचालन नहीं होने से आमजन के पास सुरक्षित परिवहन का अन्य विकल्प उपलब्ध नहीं है। ऐसे में लोग भीड़भाड़ वाली टैक्सियों में जोखिम उठाकर यात्रा करने को मजबूर हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, कई जिप टैक्सियों में 10-12 सवारियों की क्षमता होने के बावजूद 25-30 तक यात्रियों को ठूंस-ठूंसकर बैठाया जाता है। कई यात्री और विद्यार्थी गाड़ी के पीछे लटककर तथा ऊपर बैठकर सफर करते दिखाई देते हैं। इस तरह का परिवहन किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

प्रशासन की ओर से समय-समय पर इस तरह की अवैध और खतरनाक परिवहन व्यवस्था के खिलाफ कार्रवाई की जाती है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई कुछ दिनों की सख्ती तक सीमित रह जाती है। इसके बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।

क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि समस्या को गंभीरता से लेते हुए नियमित रूप से सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही रोडवेज बसों की संख्या बढ़ाकर सुरक्षित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। लोगों का कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

जनहित में परिवहन विभाग, स्थानीय प्रशासन और पुलिस प्रशासन के समन्वय से इस समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है, ताकि आम नागरिकों को सुरक्षित और सुगम यात्रा की सुविधा मिल सके।

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