खेरवाड़ा के निचला थूरिया गांव में पड़ोसी गांव के पशुपालकों द्वारा खुले में मवेशी छोड़ने से खेतों में पकी फसल और घास को नुकसान पहुंच रहा है, जिसके खिलाफ ग्रामीणों ने बावलवाड़ा पुलिस से कार्रवाई की मांग की है।

बावलवाड़ा (खेरवाड़ा)। खेरवाड़ा तहसील की ग्राम पंचायत बरौठी बा. के ग्राम निचला थूरिया में पालतू पशुओं द्वारा किसानों की पकी फसलों और बीड़ की घास को नष्ट किए जाने का मामला सामने आया है। पड़ोसी गांव डो हला काड़ी के कुछ पशुपालकों पर अपने पशुओं को खुलेआम खेतों और बीड़ में चरने के लिए छोड़ने के आरोप लगे हैं। किसानों की ओर से बावलवाड़ा पुलिस थाने में लिखित शिकायत देने के बावजूद संबंधित पशुपालकों को पाबंद नहीं किए जाने से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है।

इस वर्ष क्षेत्र में नाममात्र की बारिश होने से किसानों को पहले ही फसलों और बीड़ की घास की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, किसान अपनी बची हुई पकी फसल और मवेशियों के चारे को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पड़ोसी गांव डो हला काड़ी के कुछ असामाजिक तत्व जानबूझकर अपने पालतू पशुओं को निचला थूरिया के खेतों और बीड़ में चरने के लिए छोड़ रहे हैं। इससे किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर रहा है और उनकी पकी-पकाई फसलें लगातार बर्बाद हो रही हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि पशुओं को खेतों में घुसने से रोकने पर गांव के लोगों और महिलाओं के साथ अमर्यादित एवं अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया जाता है। विरोध करने पर आरोपी गांव के पुरुषों को महिलाओं के साथ अभद्रता करने के झूठे आरोपों में फंसाने और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराने की खुलेआम धमकियां देते हैं। खेतों और बीड़ में जाने वाली महिलाओं के साथ कथित तौर पर लगातार हो रहे इस अभद्र व्यवहार के कारण पूरे गांव में भय का माहौल बना हुआ है।

फसलों को बचाने और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किसानों ने बावलवाड़ा थानाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर संबंधित पशुपालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस प्रशासन ने अब तक आरोपियों को कानूनी रूप से पाबंद नहीं किया है। पुलिस की कथित निष्क्रियता के चलते पशुपालकों के हौसले बुलंद हैं और खेतों तथा बीड़ में फसलों एवं घास को नुकसान पहुंचने का सिलसिला जारी है।

निचला थूरिया के समस्त ग्रामीणों ने पुलिस और प्रशासन के उच्च अधिकारियों से मामले को गंभीरता से लेने की मांग की है। ग्रामीणों ने संबंधित दोषियों के खिलाफ तत्काल कानूनी पाबंदी लगाने के साथ ग्रामीणों और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। कम बारिश के बीच पहले से फसल और चारे की कमी झेल रहे किसानों के लिए यह मामला चिंता का विषय बना हुआ है।

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