खेरोदा में आयोजित 30वें मेवाड़ महिला अधिवेशन के दौरान उपस्थित मातृशक्ति और श्रवण समाज के लोग, जहाँ पूज्य प्रवर्तक गुरुदेव कोमल मुनि महाराज ने आत्मसुधार और नारी सशक्तिकरण का संदेश दिया।

खेरोदा में चंदनबाला महिला मंडल समिति (संयुक्त मेवाड़) का 30वां मेवाड़ महिला अधिवेशन उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। ‘नव सृजन : विकल्पों से बदलाव की ओर’ विषय पर आयोजित इस अधिवेशन में पूज्य प्रवर्तक गुरुदेव कोमल मुनि महाराज साहेब ‘करूणाकर’ ने आत्मसुधार, सामाजिक समन्वय, नारी सशक्तिकरण और संस्कार निर्माण का संदेश दिया। इस अवसर पर संपूर्ण मेवाड़ अंचल से बड़ी संख्या में मातृशक्ति एवं श्रावक समाज के लोगों ने भाग लिया।

खेरोदा कस्बे में चल रहे ‘पावन परिवर्तन चातुर्मास 2026’ के उपलक्ष्य में श्री वर्द्धमान जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में आयोजित इस अधिवेशन को मेवाड़ भास्कर पूज्य प्रवर्तक गुरुदेव कोमल मुनि महाराज साहेब ‘करूणाकर’ आदि ठाणा का सानिध्य एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। महिला मंडल की अध्यक्ष शालिनी तातेड़, महामंत्री प्रमिला बड़ाला एवं कोषाध्यक्ष रेखा रांका ने अधिवेशन का नेतृत्व किया।

समारोह की अध्यक्षता श्रीमती मंजुला हिंगड अहमदाबाद ने की। मुख्य अतिथि श्रीमती तारा पगारिया कांकरोली रहीं। श्रीमती निर्मला किशोर कोठारी उदयपुर, समारोह श्रीमती कमला चंडालिया घासा, समारोह सरताज श्रीमती आशा सुनील कूकड़ा खेरोदा तथा ध्वजारोहणकर्ता श्रीमती मंजू कर्णावत आसींद सहित अन्य गणमान्यजन की उपस्थिति रही।

अधिवेशन को संबोधित करते हुए मेवाड़ प्रवर्तक पूज्य कोमल मुनि महाराज ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर नवसृजन करते हुए अभावग्रस्त लोगों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने परिवारों में होने वाले आपसी मतभेदों और समस्याओं के शांतिपूर्ण समाधान के लिए समन्वय समिति के गठन की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, आने वाली पीढ़ी को सुसंस्कृत बनाने के लिए बच्चों को जैन पाठशाला भेजने का आह्वान किया।

मुनिश्री ने कहा कि नारी और गृहस्थ जीवन केवल पहचान मात्र नहीं हैं, बल्कि पवित्र संस्कारों के आधार और उच्च प्रेरणा के स्रोत हैं। आंतरिक विकारों पर मार्गदर्शन देते हुए उन्होंने क्रोध और अहंकार रूपी महिषासुर पर नियंत्रण पाने, गुरु का आत्मालंबन लेने तथा सत्य, अहिंसा और विनय के मार्ग पर चलकर जीवन को मंगलमय बनाने की प्रेरणा दी।

समारोह में अध्ययनशील, सेवारत्न हर्षित मुनि ने नारी सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि आज की नारी के लिए स्वयं को शिक्षित और स्वावलंबी बनाना अत्यंत आवश्यक है। उनके अनुसार, नारी के शिक्षित एवं स्वावलंबी बनने से ही समाज सशक्त बन सकेगा।

इसी अवसर पर पूज्य कोमल मुनि महाराज रविवार सायंकालीन प्रतिक्रमण के पश्चात नौ दिवसीय गहन ‘आत्म ध्यान साधना’ में प्रवेश कर रहे हैं। यह साधना 19 अक्टूबर तक चलेगी। साधना अवधि के दौरान नियमित प्रवचन स्थगित रहेंगे, हालांकि दर्शनार्थियों को प्रतिदिन दोपहर 3:00 बजे मांगलिक का लाभ मिलेगा।

साधना की पूर्णाहुति के अवसर पर 20 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा) के पर्व पर प्रातः 9:30 बजे भव्य महामांगलिक का आयोजन किया जाएगा। अधिवेशन और आगामी धार्मिक आयोजनों की व्यवस्थाओं में श्री वर्द्धमान जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष सुनील कूकड़ा, मंत्री मुकेश डांगी, संयोजक अरविंद बड़ाला सहित संघ के समस्त पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं का सक्रिय योगदान रहा।

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