फेक बॉस बनकर साइबर ठगों की नई चाल, राजस्थान पुलिस ने जारी की ‘Boss Scam’ एडवाइजरी
राजस्थान पुलिस ने फेक बॉस बनकर होने वाली साइबर ठगी को लेकर ‘Boss Scam’ एडवाइजरी जारी की है। ठग व्हाट्सएप और ई-मेल से अर्जेंट भुगतान, डेटा व गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
जयपुर, 01 अगस्त। फेक बॉस बनकर की जा रही साइबर ठगी को लेकर राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन और विशेष रूप से कंपनियों में कार्यरत मैनेजर, अकाउंटेंट व अन्य कर्मचारियों को सतर्क किया है। महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार पुलिस ने ‘बॉस स्कैम’ से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की है। साइबर ठग सोशल इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल कर कंपनी के बॉस, वरिष्ठ अधिकारी या बिजनेस पार्टनर बनकर व्हाट्सएप, ई-मेल अथवा एसएमएस के जरिए संपर्क करते हैं और तत्काल पैसे ट्रांसफर करने, गिफ्ट कार्ड खरीदने, डेटा साझा करने या गोपनीय जानकारी देने का दबाव बनाते हैं।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री वीके सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी ठगी से पहले कंपनी, उसके प्रमुख अधिकारियों, ई-मेल पैटर्न, कॉन्टेक्ट्स और सोशल मीडिया से जुड़ी जानकारी जुटाते हैं। इसके बाद वे वरिष्ठ अधिकारी की पहचान अपनाकर कर्मचारी से संपर्क करते हैं। विश्वास कायम करने के लिए ठग असली नाम, पद, प्रोजेक्ट और अन्य वास्तविक जानकारियों का इस्तेमाल करते हैं। इससे कर्मचारी को मैसेज वास्तविक होने का भ्रम हो जाता है।
कंप्यूटर में मालवेयर डालकर व्हाट्सएप तक पहुंच बनाने की कोशिश भी बॉस स्कैम का हिस्सा हो सकती है। एडीजी श्री सिंह के अनुसार साइबर ठग कार्यालय के लैपटॉप या डेस्कटॉप में ट्रोजन हॉर्स मालवेयर के जरिए जानकारी हासिल करने का प्रयास कर सकते हैं। यदि डेस्कटॉप व्हाट्सएप से लिंक है तो ठग क्यूआर कोड को हाईजैक कर व्हाट्सएप पर अपनी फोटो लगा सकते हैं और कर्मचारी को बॉस के नाम से धनराशि ट्रांसफर करने के लिए मैसेज भेज सकते हैं।
इसके बाद साइबर ठग तत्काल भुगतान करने, गिफ्ट कार्ड खरीदने, डेटा ट्रांसफर करने या गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराने का दबाव बनाते हैं। ठगी से हासिल रकम को म्यूल अकाउंट, क्रिप्टो अथवा नगद निकासी के जरिए आगे स्थानांतरित किया जा सकता है।
राजस्थान पुलिस ने बॉस स्कैम की पहचान के लिए कई संकेत बताए हैं। इनमें ई-मेल एड्रेस में अचानक या मामूली बदलाव, कार्यालय समय के बाद असामान्य तरीके से संपर्क किया जाना, अत्यधिक अर्जेंट या गोपनीय लेनदेन के लिए दबाव बनाना और किसी नए या अज्ञात बैंक खाते में तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश शामिल है। इसके अलावा फोन या वीडियो कॉल पर बात करने से बचना, भाषा और ग्रामर में असामान्य या गंभीर गलतियां होना तथा व्हाट्सएप, ई-मेल अथवा कॉल पर असामान्य वित्तीय निर्देश मिलना भी ऐसे साइबर फ्रॉड के संकेत हो सकते हैं।
पुलिस ने कहा है कि किसी भी वित्तीय या डेटा संबंधी अनुरोध की पुष्टि व्यक्तिगत रूप से या संबंधित व्यक्ति के आधिकारिक फोन नंबर पर कॉल करके जरूर करनी चाहिए। केवल व्हाट्सएप या ई-मेल पर मिले निर्देश के आधार पर कोई भुगतान नहीं किया जाना चाहिए। डिस्प्ले नेम देखकर भरोसा करने के बजाय पूरा ई-मेल एड्रेस और डोमेन नेम भी ध्यानपूर्वक जांचना जरूरी है।
कंपनियों को उच्च-मूल्य या असामान्य भुगतान के लिए मल्टीलेवल अप्रूवल सिस्टम लागू करने तथा केवल स्वीकृत भुगतान प्रक्रियाओं और अधिकृत संचार माध्यमों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। कर्मचारियों को व्हाट्सएप वेब और लिंक्ड डिवाइसेज के अनावश्यक सेशन लॉगआउट करने, सिस्टम, एंटीवायरस एवं सुरक्षा सॉफ्टवेयर को अपटेडड रखने और व्हाट्सएप पर टू फैक्टर वेरीफिकेशन सक्रिय रखने की भी सलाह दी गई है।
राजस्थान पुलिस ने अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति साइबर स्कैम का शिकार होता है अथवा साइबर ठग इस तरह की ठगी का प्रयास करते हैं तो इसकी सूचना तुरंत निकटतम पुलिस स्टेशन, साइबर पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दें। वित्तीय साइबर फ्रॉड होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी सूचना दी जा सकती है। ऐसे मामलों में समय पर की गई एक कॉल कंपनी की बड़ी रकम को साइबर ठगी से बचाने में अहम साबित हो सकती है।