तस्वीर में श्रीमद् भागवत कथा के दौरान पंडाल में बैठे हुए श्रद्धालु नजर आ रहे हैं।

क्षेत्र के कैलाश नगर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक संत प्रेम नारायण महाराज गेहूं खेड़ी ने श्रद्धालुओं को भक्ति, प्रभु स्मरण और जीवन के वास्तविक उद्देश्य से जुड़ने का संदेश दिया। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और भक्ति रस में डूबकर भगवान के जयकारे लगाए।

संत प्रेम नारायण महाराज ने कहा कि यह केवल कथा नहीं, बल्कि भगवान की कृपा है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को बचपन से ही भक्ति के मार्ग से जुड़ना चाहिए। बचपन में की गई भक्ति जीवनभर साथ रहती है और कठिन समय में मनुष्य को भीतर से शक्ति प्रदान करती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि प्रभु को भज लेना चाहिए, क्योंकि यही भक्ति आगे जीवन में काम आती है। इससे जीवन सुधरने के साथ मनुष्य का अंतिम समय भी प्रभु के स्मरण में बीत सकता है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य परिवार, रिश्तेदार और संसार की अनेक चीजों से संबंध जोड़ता है, लेकिन सबसे जरूरी संबंध परमात्मा से होना चाहिए। मौत चारों तरफ घूम रही है और जीवन का कोई भरोसा नहीं है। इसलिए जब तक जीवन मिला है, तब तक हरि से अपने तार जोड़ लेने चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि संसार में रहते हुए अपने कर्म करते रहें, लेकिन मन को भगवान से जोड़े रखें।

संत प्रेम नारायण महाराज ने भगवान के स्मरण की महत्ता समझाते हुए कहा कि जिस प्रकार अंधेरे कमरे में लाइट जलते ही उजाला हो जाता है, उसी प्रकार भगवान का स्मरण जीवन के अंधकार को दूर कर देता है। इसके लिए लगातार प्रार्थना करते रहना चाहिए—“हे मेरे नाथ, हे मेरे गोविंद, मैं आपको कभी भूलूं नहीं।” उन्होंने कहा कि जब भक्त सच्चे मन से भगवान को याद करता है तो भगवान भी अपने भक्त को नहीं भूलते।

उन्होंने कहा कि भगवान की याद में आंखों से आंसू आना भक्ति की गहराई को दर्शाता है। जब मनुष्य का मन संसार से हटकर प्रभु के चरणों में लगने लगता है तो उसके भीतर अलग ही शांति और आनंद का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने आचरण, कर्म और विचारों को भी प्रभु को समर्पित करना ही सच्ची भक्ति है।

कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भजनों और भगवान के जयकारों के साथ पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन संत प्रेम नारायण महाराज के संदेश में श्रद्धालुओं को भक्ति के साथ जीवन के वास्तविक उद्देश्य और परमात्मा से संबंध बनाए रखने की प्रेरणा मिली।

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