आमेट: सरदारगढ़ में हर माह 60 हजार खर्च के बाद भी कचरे का ढेर
ग्राम पंचायत सरदारगढ़ में 28 सफाईकर्मी होने के बावजूद बालाजी चौराहे और नालियों में कचरा जमा होने से लोग जलभराव की आशंका जता रहे हैं।
तस्वीर में सड़क किनारे प्लास्टिक और कचरे का ढेर तथा पास खड़ा गोवंश दिख रहा है।
आमेट। ग्राम पंचायत सरदारगढ़ की ओर से कस्बे के 15 वार्डों में सफाई व्यवस्था पर हर माह करीब 60 हजार रुपए खर्च किए जा रहे हैं, इसके बावजूद कई इलाकों में गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। नियमित सफाई और प्रभावी मॉनिटरिंग के अभाव में प्लास्टिक, घरेलू कचरा और अन्य अपशिष्ट सड़कों के किनारे तथा खाली भूखंडों में जमा हो रहे हैं।
पुराने बस स्टैंड से गंगापुर मार्ग के बीच स्थित बालाजी चौराहा क्षेत्र में स्थिति अधिक खराब है। यहां करोड़ों रुपए कीमत के खाली भूखंड में आसपास के लोग लगातार कचरा डाल रहे हैं। इससे पूरा भूखंड धीरे-धीरे अनौपचारिक डंपिंग यार्ड में तब्दील हो गया है। मौके पर प्लास्टिक की थैलियां, खाद्य सामग्री के रैपर, घरेलू कचरा सहित अन्य अपशिष्ट बिखरा हुआ है।
कचरे के ढेर के कारण यहां गोवंश और सूअरों का जमावड़ा भी बना रहता है। मवेशियों के कचरा फैलाने से आसपास का क्षेत्र और गंदा हो रहा है। बारिश के दौरान प्लास्टिक और कचरे के कारण पानी के बहाव और निकासी में भी परेशानी बढ़ने की आशंका है।
सड़क किनारे बनी नालियों में भी प्लास्टिक और अन्य कचरा जमा है। कई जगह नालियों के मुहाने तक कचरे से ढके हुए हैं। इससे बारिश के पानी की निकासी प्रभावित होने के साथ जलभराव की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत की ओर से सफाई व्यवस्था के लिए करीब 28 सफाईकर्मी लगाए गए हैं। इसके बावजूद प्रमुख स्थानों पर नियमित सफाई दिखाई नहीं दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सफाईकर्मियों की संख्या के साथ वार्डवार निगरानी और नियमित निरीक्षण भी जरूरी है।
ग्रामीणों ने बालाजी चौराहे सहित कस्बे के अन्य स्थानों की सफाई कराने और नालियों की नियमित सफाई करवाने की मांग की है। साथ ही वार्डवार कचरा संग्रहण और मॉनिटरिंग व्यवस्था मजबूत करने की आवश्यकता जताई है। सफाई व्यवस्था पर हर माह करीब 60 हजार रुपए खर्च होने के बावजूद प्रमुख स्थानों पर कचरे का जमा रहना व्यवस्था और निगरानी के स्तर पर सवाल खड़े करता है।