सीए की पढ़ाई और नौकरी छोड़ अंकित जैन ने अपनाया संयम, बने मुनि अभिनव सागर जी महाराज
प्रतापगढ़ जिले के अचनेरा गांव के अंकित जैन ने सीए की पढ़ाई पूरी करने और नौकरी करने के बाद सांसारिक जीवन त्याग दिया। 25 अक्टूबर को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर जैन मुनि दीक्षा लेकर वे मुनि श्री 108 अभिनव सागर जी महाराज बने।
सीए अंकित जैन ने दिल्ली में आयोजित समारोह में जैन मुनि दीक्षा ग्रहण की।
प्रतापगढ़ जिले के अचनेरा गांव के निवासी अंकित जैन ने चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) की पढ़ाई पूरी करने और नौकरी करने के बाद सांसारिक जीवन का त्याग कर संयम का मार्ग अपना लिया। 25 अक्टूबर को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर जैन समाज की मौजूदगी में आयोजित समारोह में उन्होंने जैन मुनि दीक्षा ग्रहण की। दीक्षा के बाद वे मुनि श्री 108 अभिनव सागर जी महाराज के नाम से जाने जाएंगे।
अंकित जैन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अचनेरा गांव में प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने इंदौर में सीए की पढ़ाई पूरी कर उपाधि हासिल की और नौकरी भी की। शिक्षा पूरी करने और नौकरी करने के बाद वैराग्य की भावना से प्रेरित होकर उन्होंने सांसारिक सुख-सुविधाओं का त्याग करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही उन्होंने धर्म और आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।
दीक्षा से पहले अचनेरा गांव में धार्मिक आयोजन किया गया और वरघोड़ा निकाला गया। इस दौरान अंकित जैन ने अपने माता-पिता का आशीर्वाद लिया। सांसारिक जीवन से विदाई के इस अवसर पर परिवार के सदस्यों की आंखें नम हो गईं। इसके बाद परिवारजन और ग्रामीण दिल्ली पहुंचे, जहां 25 अक्टूबर को आयोजित दीक्षा समारोह में उन्होंने भाग लिया।
दिल्ली में दीक्षा समारोह के तहत विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें सुलोचना, हल्दी-मेहंदी की रस्मों और भव्य वरघोड़े जैसे आयोजन शामिल रहे। इन कार्यक्रमों में जैन समाज के लोगों ने उत्साह के साथ भाग लिया। धार्मिक रीति-रिवाजों के बीच अंकित जैन ने दीक्षा ग्रहण कर संयम जीवन की शुरुआत की और मुनि श्री 108 अभिनव सागर जी महाराज के रूप में नई आध्यात्मिक यात्रा शुरू की।
सीए की पढ़ाई पूरी करने और नौकरी करने के बाद अंकित जैन का सांसारिक जीवन छोड़कर जैन मुनि बनना उनके जीवन का महत्वपूर्ण बदलाव है। अचनेरा गांव से शुरू हुआ उनका सफर दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर दीक्षा के साथ नए पड़ाव पर पहुंचा, जहां उन्होंने धर्म, वैराग्य और आत्मकल्याण के मार्ग को अपनाया।