नवी मुंबई के वाशी में तेरापंथ युवक परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रमों के दौरान मौजूद साध्वीवृंद और समाज के लोग।   

नवी मुंबई के वाशी में तेरापंथ युवक परिषद (TYP) ने युवा पीढ़ी को धर्मसंघ की साहित्यिक विरासत, आचार्यों के जीवन-दर्शन और संस्कारों से जोड़ने के लिए तीन अभिनव कार्यक्रम आयोजित किए। चातुर्मास के दौरान परम पूज्य शासन श्री साध्वी श्री शिवमलाजी (ठाणा-3) की पावन सन्निधि एवं प्रेरणादायी मार्गदर्शन में आयोजित इन कार्यक्रमों के माध्यम से साहित्य अध्ययन, नेतृत्व क्षमता, प्रबंधन कौशल और विभिन्न पीढ़ियों के बीच संवाद को नया मंच मिला। साध्वी श्री शिवमलाजी ने युवाओं से धर्म एवं ज्ञान की विरासत को केवल सुनने तक सीमित न रहने, बल्कि उसकी गहराई को समझने, आत्मसात करने और दैनिक जीवन में उतारने का सचेत प्रयास करने का आह्वान किया। साध्वी श्री अमितप्रभाजी ने भी प्रेरणादायी उद्बोधन दिया।

TYP वाशी की इन तीन पहलों के नाम “महाप्रज्ञ ने क्या कहा?”, “11 से 11 तक” और “खोल पोल, कुछ तो बोल!” रहे। तीनों कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को धर्म, साहित्य, नेतृत्व और जीवन मूल्यों से जोड़ना था।

पहली पहल “महाप्रज्ञ ने क्या कहा?” के तहत 06.09.2026 को कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य युवा पीढ़ी को आचार्य श्री महाप्रज्ञजी के जीवनोपयोगी विचारों, अमूल्य साहित्य और जीवन-दर्शन से परिचित कराना था। कार्यक्रम में किशोर मंडल, कन्या मंडल, युवक परिषद, सभा और तेरापंथ समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े अलग-अलग आयु समूहों के कुल 30 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

प्रत्येक प्रतिभागी को “महाप्रज्ञ ने क्या कहा?” पुस्तक के हिंदी अथवा अंग्रेजी संस्करण से एक अलग विषय या अध्याय दिया गया था। उन्हें मंच पर आकर मात्र दो मिनट में निर्धारित अध्याय का सार, उसमें निहित जीवन संदेश और व्यावहारिक सीख प्रस्तुत करनी थी। इस दौरान प्रतिभागियों ने केवल अध्यायों का सारांश नहीं बताया, बल्कि आचार्य श्री महाप्रज्ञजी के विचारों को अपनी भाषा में समझाया और उन शिक्षाओं को दैनिक जीवन में अपनाने के तरीकों पर भी प्रकाश डाला।

अधिवक्ता ललित जैन, अध्यक्ष TYP वाशी ने कहा कि युवा पीढ़ी में साहित्य के प्रति रुचि विकसित करने के लिए इस प्रकार के अभिनव प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं। किसी भी धार्मिक संस्था की पहचान उसके साहित्य और वैचारिक विरासत में निहित होती है। उन्होंने कहा कि उद्देश्य केवल युवाओं को साहित्य से परिचित कराना नहीं, बल्कि उन्हें पढ़ने, समझने, आत्मसात करने और जीवन में व्यवहार के रूप में उतारने के लिए प्रेरित करना होना चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन श्री रणजीत खांटेड ने किया। उनके मंच प्रबंधन ने कार्यक्रम को व्यवस्थित और रोचक बनाए रखा। कार्यक्रम के अंत में प्रत्येक प्रतिभागी को “महाप्रज्ञ ने क्या कहा?” पुस्तक श्रृंखला की एक पुस्तक भेंट की गई। श्रीमती निर्मला चंडालिया ने निर्णायक की भूमिका निभाई। इस कार्यक्रम में 350 से अधिक लोगों की सहभागिता रही। इस पहल के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि साहित्य केवल पुस्तकों तक सीमित न रहे, बल्कि विचारों, व्यवहार और जीवन का अभिन्न अंग बने।

TYP वाशी की दूसरी पहल “11 से 11 तक” का आयोजन 10.10.2026 को किया गया। इस कार्यक्रम में तेरापंथ धर्मसंघ के गौरवशाली इतिहास और समृद्ध विरासत को आधुनिक कॉर्पोरेट प्रबंधन, व्यवसायिक विकास और पारिवारिक संबंधों से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में तेरापंथ धर्मसंघ के 11 आचार्यों और एक युवाचार्य के जीवन, नेतृत्व क्षमता, विशिष्ट गुणों तथा उनके कई अल्पज्ञात योगदानों को व्यावहारिक जीवन कौशल के दृष्टिकोण से समझाया गया।

कार्यक्रम में कुल 12 प्रतिभागियों ने भाग लिया। 11 प्रतिभागियों ने 11 आचार्यों एवं युवाचार्य के जीवन से जुड़े विशेष कौशल प्रस्तुत किए। इसकी खास बात यह रही कि सभी प्रस्तुतियां किशोर मंडल और कन्या मंडल के सदस्यों ने दीं। प्रत्येक प्रतिभागी को लगभग ढाई मिनट का समय दिया गया था। इस दौरान उन्हें संबंधित आचार्य अथवा युवाचार्य के जीवन की रोचक एवं कम ज्ञात घटनाओं के साथ उनसे मिलने वाली महत्वपूर्ण कॉर्पोरेट स्किल या प्रबंधन की सीख प्रस्तुत करनी थी।

प्रतिभागियों ने बताया कि आचार्यों के जीवन में दिखाई देने वाले नेतृत्व गुण, संगठन क्षमता, अनुशासन, निर्णय लेने की कला, दूरदृष्टि, संवाद शैली और प्रबंधन सिद्धांतों को व्यवसायिक विकास, प्रभावी टीम प्रबंधन तथा पारिवारिक समस्याओं के समाधान में किस प्रकार अपनाया जा सकता है। प्रस्तुतियों के माध्यम से यह बताया गया कि आचार्यों का जीवन केवल ऐतिहासिक घटनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि उसमें आज के कॉर्पोरेट जगत, उद्यमियों और परिवारों के लिए भी महत्वपूर्ण प्रबंधन सिद्धांत समाहित हैं।

श्री चेतन कोठारी ने कार्यक्रम का उद्देश्य प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति और काव्य पाठ ने वातावरण को आनंदमय एवं रोचक बनाया। कार्यक्रम के उद्देश्य की स्पष्ट व्याख्या से श्रोताओं को इसकी विशिष्टता और आगे होने वाली प्रस्तुतियों की दिशा समझने में सहायता मिली।

कार्यक्रम का एक उल्लेखनीय आकर्षण मात्र 12 वर्ष के मास्टर कृतांश ललित जैन द्वारा संस्कृत भाषा में दिया गया धन्यवाद ज्ञापन रहा। इतनी कम आयु में संस्कृत में उनके आत्मविश्वासपूर्ण प्रस्तुतीकरण ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया और यह कार्यक्रम के यादगार क्षणों में शामिल रहा।

कार्यक्रम का संचालन TYP वाशी के कोषाध्यक्ष श्री विजेंद्र मेहता ने किया। उनके समन्वय और मंच प्रबंधन ने कार्यक्रम के आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रत्येक प्रतिभागी को सभी आचार्यों का फोटो फ्रेम भी भेंट किया गया। कार्यक्रम में 160 से अधिक श्रावक-श्राविकाओं की सहभागिता रही। “11 से 11 तक” के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आचार्यों की प्रज्ञा और जीवन-दर्शन धार्मिक सीमाओं से आगे तक विस्तृत हैं। उनके गुणों और कौशलों से सीख लेकर उन्हें व्यवसाय, परिवार और दैनिक जीवन में अपनाना आवश्यक है।

TYP वाशी की तीसरी पहल “खोल पोल, कुछ तो बोल!” का आयोजन 01.11.2026 को तेरापंथ महिला मंडल (TMM), वाशी के सहयोग से किया गया। इसका उद्देश्य खुले विचारों, स्वतंत्र चिंतन और विभिन्न पीढ़ियों के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम अंतरपीढ़ी वाद-विवाद प्रतियोगिता के रूप में आयोजित हुआ, जिसमें किशोर मंडल एवं कन्या मंडल के Gen Z युवाओं को Millennials पीढ़ी के सदस्यों के सामने धर्म, पहचान और व्यक्तिगत मूल्यों से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखने का अवसर मिला।

प्रतियोगिता में कुल 21 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें Gen Z के 11 और Millennials पीढ़ी के 10 सदस्य शामिल थे। कार्यक्रम में 170 से अधिक श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति रही। वाद-विवाद के लिए दो विषय निर्धारित किए गए थे।

पहला विषय “धर्म: चुनाव या जिम्मेदारी?” था। इस विषय पर Millennials टीम को धर्म को कर्तव्य एवं जिम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत करना था, जबकि Gen Z टीम का पक्ष था कि धर्म को किसी बाध्यता के रूप में नहीं, बल्कि व्यक्तिगत पसंद, स्वेच्छा और सही समझ के आधार पर अपनाया जाना चाहिए।

दूसरा विषय “व्यक्ति की पहचान किससे – चरित्र से या पहनावे से?” रखा गया। इसमें Millennials टीम ने व्यक्ति की पहचान के महत्वपूर्ण पहलुओं के रूप में पहनावे और बाहरी व्यक्तित्व को प्रस्तुत किया। इसके विपरीत Gen Z टीम ने तर्क दिया कि व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके चरित्र, आचरण और संस्कारों से होती है, न कि उसके पहनावे से।

दोनों विषयों पर हुई बहस में प्रतिभागियों ने अपने-अपने पक्ष में तर्क रखे और एक-दूसरे से चुनौतीपूर्ण प्रश्न एवं प्रति-प्रश्न किए। जहां Millennials पीढ़ी के अनुभव और पारंपरिक दृष्टिकोण सामने आए, वहीं Gen Z की स्वतंत्र सोच और नए विचारों ने चर्चा को जीवंत बनाया।

यह कार्यक्रम केवल पारंपरिक वाद-विवाद प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं को आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने, स्थापित मान्यताओं पर प्रश्न करने, अपने विचारों का समर्थन करने और वरिष्ठ पीढ़ी के साथ रचनात्मक संवाद करने का मंच बना। प्रतियोगिता के निर्णायक श्री पवनजी परमार एवं श्रीमती संगीता जी बाफना थे। संपूर्ण कार्यक्रम उपासक श्री रतनजी सियाल के कुशल मार्गदर्शन में हुआ। उन्होंने स्पीकर ऑफ द हाउस की भूमिका निभाते हुए बहस को अनुशासित, संतुलित और रोचक बनाए रखा। कार्यक्रम का संचालन TYP वाशी के मंत्री श्री विकास किवेसरा ने किया।


 


“खोल पोल, कुछ तो बोल!” के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि धर्म और संस्कारों की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए युवा पीढ़ी को केवल सुनने के लिए प्रेरित करना पर्याप्त नहीं है। उन्हें सोचने, प्रश्न करने, बहस करने और विषयों को समझने के लिए भी प्रोत्साहित करना आवश्यक है। कार्यक्रम का आयोजन भिक्षु महाश्रमण फाउंडेशन, वाशी में शासन श्री शिवमलाजी ठाणा-3 की पावन सन्निधि में किया गया।

तीनों कार्यक्रमों के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अधिवक्ता ललित जैन ने कहा कि तेरापंथ युवक परिषद, वाशी का उद्देश्य धर्मसंघ के गौरवशाली इतिहास, साहित्य और ज्ञान परंपरा को युवा पीढ़ी के लिए प्रासंगिक बनाना है। उन्होंने कहा कि आचार्यों के जीवन में समाहित नेतृत्व के सिद्धांत न केवल आध्यात्मिक जीवन, बल्कि व्यवसाय, पेशेवर प्रबंधन और पारिवारिक संबंधों में भी अमूल्य मार्गदर्शन प्रदान कर सकते हैं।

उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि चातुर्मास के अवसर पर विभिन्न पीढ़ियों के लोग एक साझा मंच पर एकत्रित हुए। उनके अनुसार, TYP वाशी का उद्देश्य पारंपरिक कार्यक्रमों तक सीमित रहना नहीं, बल्कि ऐसे अभिनव मंच तैयार करना है जो युवाओं को धर्म, साहित्य और धर्मसंघ के मूल संस्कारों से जोड़ें।

अधिवक्ता ललित जैन ने कहा कि युवाओं को केवल निष्क्रिय श्रोता बनकर नहीं रहना चाहिए। उन्हें सोचने, प्रश्न करने, अपनी राय व्यक्त करने और धर्म एवं परंपराओं के गहरे अर्थ को समझने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे अनेक अभिनव प्रयास आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की, ताकि तेरापंथ धर्मसंघ की समृद्ध साहित्यिक और बौद्धिक विरासत प्रत्येक पीढ़ी तक पहुंच सके।

उन्होंने तीनों कार्यक्रमों के सफल आयोजन में योगदान देने वाली संस्थाओं, पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और श्रावक-श्राविकाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, वाशी के अध्यक्ष श्री पंकज चंडालिया और उनकी टीम, भिक्षु महाश्रमण फाउंडेशन, वाशी के अध्यक्ष श्री कमलेश बोहरा और उनकी टीम, तेरापंथ महिला मंडल, वाशी की अध्यक्ष श्रीमती स्वीटी खांटेड और उनकी टीम तथा तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम, नवी मुंबई के अध्यक्ष श्री अरविंद खटेड और उनकी टीम के सहयोग की सराहना की।

उन्होंने सभी संस्थाओं के पदाधिकारियों, टीम सदस्यों और सहयोगी कर्मचारियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। साथ ही TYP वाशी की कार्यसमिति, स्वयंसेवकों तथा वाशी एवं नवी मुंबई के श्रावक-श्राविकाओं का विशेष धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों की सफलता किसी एक व्यक्ति या संस्था की उपलब्धि नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज की सामूहिक सहभागिता, समर्पण और सहयोग का परिणाम है।

TYP वाशी की इन तीन पहलों ने साहित्य अध्ययन, आचार्यों के जीवन से प्रबंधन की सीख और पीढ़ियों के बीच विचार-विमर्श को एक साझा मंच पर प्रस्तुत किया। परिषद का संकल्प है कि परंपरा को केवल आगे बढ़ाना ही नहीं, बल्कि उसे युवा पीढ़ी के विचारों, व्यवहार और जीवन से जोड़ना ही वास्तविक उद्देश्य है।