मुंबई के बोरीवली पूर्व में बेस्ट बस डिपो की जमीन पर 27 दुकानों के तोड़े जाने के बाद प्रभावित दुकानदारों के पुनर्वास की मांग को लेकर धरने पर बैठे पूर्व भाजपा सांसद गोपाल शेट्टी और अन्य लोग।   

मुंबई। बोरिवली पूर्व में बेस्ट बस डिपो की जमीन पर स्थित 27 अवैध व्यावसायिक दुकानों को बीएमसी द्वारा ध्वस्त किए जाने के बाद मामला राजनीतिक तूल पकड़ने लगा है। पूर्व भाजपा सांसद गोपाल शेट्टी ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए बुधवार, 4 नवंबर 2026 को प्रभावित दुकानदारों और किरायेदारों के समर्थन में बीएमसी अधिकारियों के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों पर लापरवाही बरतने और अदालत में मामले का सही पक्ष प्रस्तुत नहीं करने का आरोप लगाया।

धरने को संबोधित करते हुए गोपाल शेट्टी ने बीएमसी अधिकारियों के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना और संदिग्ध बताया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण अदालत में प्रभावित दुकानदारों का पक्ष और मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसका परिणाम यह हुआ कि 27 दुकानदारों और उनसे जुड़े परिवारों के रोजगार पर अचानक संकट खड़ा हो गया।

गोपाल शेट्टी ने दावा किया कि शायद इतिहास में यह पहला मौका है, जब अदालत ने प्रभावित पक्षों और दुकानदारों की बात पर्याप्त रूप से सुने बिना ही दुकानों को ध्वस्त करने का आदेश दे दिया। उन्होंने बीएमसी के कानूनी और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उनकी 'शरारतपूर्ण भूमिका' के कारण यह स्थिति पैदा हुई। अधिकारियों ने अदालत के सामने जमीन और दुकानदारों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया।

पूर्व सांसद ने मांग की कि जिन 27 दुकानदारों की रोजी-रोटी प्रभावित हुई है, उनके पुनर्वास के लिए बीएमसी प्रशासन तत्काल उचित कदम उठाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावित दुकानदारों को न्याय दिलाने के साथ उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।

गौरतलब है कि बीएमसी ने बोरिवली पूर्व में बेस्ट बस डिपो की जमीन से 27 अवैध व्यावसायिक दुकानों को हटाकर 3,400 वर्ग मीटर जमीन खाली कराई है। इस कार्रवाई से बस डिपो का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, दूसरी ओर अपनी ही पार्टी के पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी के बीएमसी अधिकारियों के खिलाफ धरने पर बैठने से प्रशासन और सत्ताधारी गुट में खलबली मच गई है।

गोपाल शेट्टी ने साफ किया कि जब तक प्रभावित दुकानदारों को उचित न्याय और वैकल्पिक व्यवस्था नहीं मिल जाती, तब तक नागरिकों के अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी। 27 दुकानों पर हुई तोड़क कार्रवाई के बाद अब यह मामला दुकानदारों के पुनर्वास, बीएमसी अधिकारियों की जवाबदेही और बोरिवली की स्थानीय राजनीति से जुड़ा अहम मुद्दा बन गया है।

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