पवई झील का पानी बनेगा पीने योग्य, बीएमसी ने शुरू की पुनरुद्धार योजना
132 साल बाद पवई झील के पानी को दोबारा शुद्ध करने की तैयारी, बीएमसी ने सफाई और जल शोधन के लिए सलाहकारों की नियुक्ति शुरू की।
मुंबई में जल संकट से निपटने के लिए बीएमसी पवई झील के कायाकल्प और जल शोधन की योजना पर काम कर रही है।
मुंबई में पानी की कमी और कम बारिश की चुनौती के बीच बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने पवई झील के पानी को दोबारा पीने योग्य बनाने की दिशा में अहम पहल की है। करीब 132 साल से पेयजल के रूप में इस्तेमाल नहीं हो रही इस प्रसिद्ध झील के पुनरुद्धार और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रशासन ने योजना पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत झील की सफाई, गाद निकालने और जल गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए विशेष सलाहकारों की नियुक्ति की जा रही है। योजना पूरी होने पर मुंबईकरों को पानी का एक अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध हो सकेगा।
पवई झील का निर्माण अंग्रेजों के शासनकाल में वर्ष 1891 में मीठी नदी की एक सहायक नदी पर बांध बनाकर किया गया था। हालांकि, पानी की गुणवत्ता खराब होने के कारण निर्माण के महज दो साल बाद, वर्ष 1893 में ही इसे पीने के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया गया था। अब बीएमसी ने झील की स्थिति सुधारकर इसके पानी को फिर से पीने योग्य बनाने का लक्ष्य रखा है।
वर्तमान में लगभग 290 हेक्टेयर यानी 557 एकड़ क्षेत्र में फैली इस झील में गंदे पानी की आवक रोकने के लिए सभी 18 सीवर लाइनों को दूसरी तरफ मोड़ दिया गया है। पहले इन नालों का गंदा पानी सीधे झील में गिरता था। अब इसकी आवक रोककर आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के माध्यम से गंदे पानी को साफ किया जा रहा है।
नासिक की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, झील में कचरा और गाद जमा होने के कारण उसकी जल संग्रहण क्षमता काफी कम हो गई है। इस समस्या से निपटने और झील की स्वच्छता बनाए रखने के लिए ग्रीन यात्रा संस्था को सलाहकार बनाया गया है। वहीं, वन्यजीवों और जैव विविधता के संरक्षण के लिए बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) की मदद ली जा रही है। झील से जलकुंभी और खरपतवार हटाने के लिए विशेष हार्वेस्टर मशीनें भी लगाई गई हैं।
योजना के अगले चरण में इन शुरुआती कार्यों को पूरा करने और पर्यावरण विभाग से अनुमति मिलने के बाद आधुनिक जल शोधन केंद्र बनाया जाएगा। इसके माध्यम से झील के पानी को शुद्ध कर पीने योग्य बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
बीएमसी की इस योजना का उद्देश्य पवई झील की जल गुणवत्ता में सुधार करने के साथ उसकी जल संग्रहण क्षमता और स्वच्छता से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना है। मुंबई में पानी की कमी और कम बारिश की स्थिति को देखते हुए झील के पानी को दोबारा पेयजल के रूप में उपयोग करने की यह पहल भविष्य में शहर की जलापूर्ति के लिए एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।