मुंबई। गर्मियों में संभावित जल संकट से निपटने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने शहर के पुराने कुओं को फिर से उपयोग में लाने की योजना बनाई है। इसके तहत मुंबई के प्रत्येक वार्ड में छह से सात पुराने कुओं की सफाई, मरम्मत और गहरीकरण किया जाएगा। इस वर्ष कम बारिश और मौसम में बदलाव के कारण मार्च और अप्रैल में पानी की कमी की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने यह कदम उठाया है।

बीएमसी की योजना का उद्देश्य पीने योग्य पानी का उपयोग केवल पेयजल के रूप में सुनिश्चित करना है। गाड़ी धोने, सफाई और इस तरह के अन्य कार्यों के लिए कुओं के पानी का इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि साफ पानी की खपत कम हो और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सके।

योजना के तहत बीएमसी प्रत्येक वार्ड को करीब 30 लाख रुपये उपलब्ध करा रही है। इस राशि से लंबे समय से बंद पड़े कुओं की सफाई और गहरीकरण का काम किया जाएगा। इन कुओं पर सोलर पैनल भी लगाए जाएंगे, जिससे सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली उपलब्ध होगी और मोटर की मदद से पानी निकाला जा सकेगा।

इसके अलावा, बोरवेल के पानी को भी कुओं से जोड़ने की सलाह दी गई है। इसका उद्देश्य भूमिगत जलस्तर बनाए रखना और पानी की बर्बादी रोकना है। प्रशासन इन उपायों के जरिए उपलब्ध जल संसाधनों का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करने की तैयारी कर रहा है।

महापौर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कुओं के जीर्णोद्धार और जल संरक्षण से जुड़े कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही बांधों में जमा गंदगी और गाद को समय पर निकालने पर भी जोर दिया गया है, ताकि बारिश के दौरान अधिकतम पानी का संग्रह किया जा सके।

मुंबई में गर्मियों के दौरान पानी की संभावित कमी को देखते हुए बीएमसी पुराने कुओं को दोबारा उपयोग में लाने, सौर ऊर्जा से पानी निकालने और जल स्रोतों के संरक्षण पर काम कर रही है। प्रशासन की इस योजना का उद्देश्य पेयजल की खपत पर दबाव कम करना और आने वाले महीनों में शहर को जल संकट से बचाने के लिए उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।

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