महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति और किसानों की आर्थिक परेशानियों के बीच करीब 12 करोड़ रुपये की महंगी वीआईपी गाड़ियां खरीदने की तैयारी को लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष ने सवाल उठाया कि जब किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और उन्हें राहत पाने के लिए पंचनामे तक कराने में परेशानी हो रही है, तब सरकार को महंगी गाड़ियों पर खर्च करने के बजाय किसानों की मदद को प्राथमिकता देनी चाहिए।

विपक्ष ने सरकार से मांग की कि गाड़ियों की खरीद पर खर्च होने वाली राशि किसानों को आर्थिक सहायता देने में लगाई जाए। साथ ही, मंत्रियों से दिल्ली के दौरे करने के बजाय गांवों में जाकर किसानों की समस्याएं समझने की अपील की गई। विपक्ष का कहना है कि सूखे से प्रभावित किसानों की परेशानियों के बीच सरकारी खर्च की प्राथमिकताओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

मुंबई की सड़कों की खराब हालत और सीमेंट-कंक्रीट की सड़कों के निर्माण कार्यों को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए। सड़क निर्माण पर किए गए खर्च की जांच कराने और इस संबंध में श्वेतपत्र जारी करने की मांग की गई। विपक्ष ने कहा कि सड़क निर्माण पर खर्च की गई राशि का ब्योरा सामने आना चाहिए, ताकि इस पर जवाबदेही तय हो सके।

इसके अलावा, मुंबई महानगरपालिका की सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) से निकाली गई रकम और उसके इस्तेमाल का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई गई। विपक्ष ने सवाल किया कि महानगरपालिका की जमा राशि में से निकाली गई रकम का उपयोग किन कार्यों में किया गया और उसका पूरा विवरण जनता के सामने क्यों नहीं रखा जा रहा है।

मतदाता सूची से नाम हटाने और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर भी विपक्ष ने सवाल खड़े किए। विपक्ष ने कहा कि केवल नाम या जन्मतिथि में गलती होने के आधार पर किसी व्यक्ति को घुसपैठिया नहीं माना जा सकता। इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए।

विपक्ष ने भाजपा नेताओं पर जरूरी जनहित के मुद्दों से ध्यान हटाने का आरोप लगाया। उसने सरकार से किसानों को राहत देने, मुंबई की सड़कों की स्थिति सुधारने और जनता के पैसे के इस्तेमाल का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की। किसानों का आर्थिक संकट, सड़क निर्माण पर खर्च और महानगरपालिका की जमा राशि का उपयोग ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा है।

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