मुंबई में गहराया जल संकट, सातों झीलों में सिर्फ 8.34% पानी बचा; बीएमसी बढ़ा सकती है कटौती
मुंबई की सात प्रमुख झीलों में जल भंडार घटकर सिर्फ 8.34% रह गया है। अपर वैतरणा सूख चुकी है और तानसा-भातसा में भी पानी बेहद कम है। बीएमसी 10% की मौजूदा कटौती बढ़ाकर 20% करने पर विचार कर रही है।
मुंबई में पेयजल संकट का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। शहर और उपनगरों को पानी की आपूर्ति करने वाली सात प्रमुख झीलों में जल भंडार घटकर कुल क्षमता का महज 8.34 प्रतिशत रह गया है। जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश में देरी के चलते झीलों का जलस्तर तेजी से गिर रहा है। हालात को देखते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) प्रशासन मौजूदा 10 प्रतिशत पानी कटौती को बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने पर विचार कर रहा है। इस कदम से प्रतिदिन लगभग 800 लाख लीटर पानी बचाने का लक्ष्य है।
प्रातःकाल संवाददाता
मुंबई को रोजाना लगभग 4,100 लाख लीटर पानी की आपूर्ति की जाती है, लेकिन इस वर्ष बांधों में उपलब्ध पानी की स्थिति पिछले साल की तुलना में काफी चिंताजनक है। बीएमसी के आंकड़ों के अनुसार, सातों झीलों में कुल भंडारण क्षमता के मुकाबले केवल 1,20,712 लाख लीटर उपयोगी पानी शेष है। पिछले वर्ष इसी अवधि में बांधों में 26.84 प्रतिशत पानी उपलब्ध था, जबकि इस बार जल भंडार घटकर केवल 8.34 प्रतिशत रह गया है।
सातों झीलों की स्थिति पर नजर डालें तो अपर वैतरणा झील का उपयोगी पानी पूरी तरह समाप्त हो चुका है। तानसा में महज 2.63 प्रतिशत और भातसा में 7.66 प्रतिशत पानी बचा है। फिलहाल विहार और मोदक सागर झीलों में सबसे अधिक पानी उपलब्ध है। जलग्रहण क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश नहीं होने से जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
जल संकट से निपटने के लिए बीएमसी प्रशासन वैकल्पिक जल स्रोतों के इस्तेमाल पर जोर दे रहा है। प्रशासन ने नागरिकों से कुओं के पानी का उपयोग करने की अपील की है। हालांकि, मुंबई की विशाल आबादी की जरूरतों को देखते हुए यह विकल्प पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। दूसरी ओर, महाराष्ट्र सरकार ने आपात स्थिति में उपयोग के लिए आरक्षित पानी के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है।
बीएमसी प्रशासन वर्तमान में लागू 10 प्रतिशत पानी कटौती को बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने पर विचार कर रहा है। कटौती बढ़ने की स्थिति में प्रतिदिन लगभग 800 लाख लीटर पानी की बचत की जा सकेगी। जल विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून ने जल्द जोर नहीं पकड़ा, तो आने वाले दिनों में मुंबई की जलापूर्ति व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो सकती है।
बीएमसी ने नागरिकों से पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करने और किसी भी तरह की बर्बादी रोकने की अपील की है। झीलों में लगातार घटते जल भंडार और बारिश में देरी के बीच अब मुंबई की जलापूर्ति व्यवस्था के लिए आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे।