ठाणे में श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ महिला मंडल द्वारा आचार्य श्री भिक्षु के जीवन पर आधारित महानाटिका ‘आठवाँ कौन?’ के मंचन के अवसर पर संबोधित करते हुए मुनिश्री।

ठाणे में श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ महिला मंडल की ओर से 31 अक्टूबर 2026 को आचार्य श्री भिक्षु पर आधारित महानाटिका ‘आठवाँ कौन?’ का मंचन किया गया। रहस्य, धर्म और आध्यात्मिक संदेश से जुड़ी इस नाटिका में अन्याय, क्रोध, पारिवारिक संवेदनाओं, प्रतिशोध, क्षमा और आत्मिक परिवर्तन जैसे विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में ठाणे एवं मुंबई के विभिन्न उपनगरों से लगभग 700 दर्शक उपस्थित रहे।

परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण के सुशिष्य मुनिश्री कुलदीप कुमार स्वामी की प्रेरणा तथा मुनि श्री मुकुल कुमार स्वामी के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुनि श्री मुकुल कुमार स्वामी ने नमस्कार महामंत्र के उच्चारण के साथ किया। इसके बाद महिला मंडल की बहनों ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। मंडल अध्यक्ष संगीता चंडालिया ने उपस्थित अतिथियों, समाजजनों और दर्शकों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। तेरापंथ सभा के अध्यक्ष श्री नरेश बाफना और मंत्री श्री राजेश बाफना ने महिला मंडल को नाटिका की प्रस्तुति के लिए शुभकामनाएं दीं।



मुनि श्री मुकुल कुमार स्वामी के निर्देशन, मार्गदर्शन और अथक परिश्रम से नाटिका की प्रस्तुति प्रभावशाली बनी। उन्होंने नाटिका की प्रत्येक बारीकी पर विशेष ध्यान दिया और कलाकारों को संवादों की भावपूर्ण अभिव्यक्ति तथा दृश्यों की सटीकता के लिए मार्गदर्शन दिया। उनके समर्पण और निरंतर प्रयासों से कलाकारों ने अपने-अपने पात्रों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

कलाकारों के सशक्त अभिनय, जीवंत संवाद, उत्कृष्ट मंच सज्जा और प्रभावी तकनीकी संयोजन ने दर्शकों को प्रस्तुति के अंत तक बांधे रखा। नाटिका में अन्याय, क्रोध, पारिवारिक संवेदनाओं, प्रतिशोध, क्षमा और आत्मिक परिवर्तन जैसे विषयों को रोचक एवं भावपूर्ण तरीके से दर्शाया गया। इसके माध्यम से धर्मयुक्त क्षमा, करुणा, आत्मपरिवर्तन, धर्म के प्रति आस्था एवं विश्वास तथा संघ और संघपति के प्रति निष्ठा को जीवन के सच्चे मूल्यों के रूप में प्रस्तुत किया गया। नाटिका के मुख्य लेखक दीपेश मोटावत ने भी इस अवसर पर अपने अनुभव साझा किए।

कार्यक्रम के समापन पर महिला मंडल की कोषाध्यक्ष लीला सिंघवी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से प्रायोजक परिवारों और आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी सहयोगियों का धन्यवाद किया।



कार्यक्रम का मंच संचालन प्रिया मुथा, संयोजिका मीनाक्षी श्रीश्रीमाल और सहसंयोजिका पुष्पा श्रीश्रीमाल ने किया। नाटिका का आलेखन हर्षा श्रीश्रीमाल एवं लविशा दुग्गड़ ने किया। तकनीकी संयोजन की जिम्मेदारी कोमल श्रीश्रीमाल, महिला मंडल मंत्री खुशबू पामेचा और राशि श्रीश्रीमाल ने संभाली। आयोजन में संदीप रांका, राजेश मटेवरा, देवेंद्र पुनामिया, वर्षा पुनामिया, कल्पना चंडालिया और स्वीटी छाजेड़ का विशेष योगदान रहा।

इस आयोजन को सफल बनाने में तेरापंथ सभा ठाणे, श्री भिक्षु महाप्रज्ञ ट्रस्ट ठाणे, मुंबई अणुव्रत समिति, तेरापंथ युवक परिषद (ठाणे, वागले इस्टेट एवं मुंब्रा), तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम (TPF), ज्ञानशाला परिवार, किशोर मंडल और कन्या मंडल का सराहनीय सहयोग प्राप्त हुआ।

लगभग 700 दर्शकों की उपस्थिति में हुई इस प्रस्तुति के माध्यम से तेरापंथ महिला मंडल ने आचार्य श्री भिक्षु के जीवन और महिमा से जुड़े प्रसंगों को नाट्य रूप में प्रस्तुत करने के साथ क्षमा, करुणा, धार्मिक आस्था और आत्मपरिवर्तन के आध्यात्मिक संदेश को दर्शकों तक पहुंचाया।

Tags: