मुंबई में फेरीवालों के खिलाफ बीएमसी और पुलिस की लगातार दंडात्मक कार्रवाई का मुद्दा शुक्रवार को बीएमसी की स्थायी समिति की बैठक में प्रमुखता से उठा। मनसे, शिवसेना और भाजपा समेत सभी दलों के पार्षदों ने क्यूआर कोड प्राप्त फेरीवालों पर तुरंत कार्रवाई रोकने की पुरजोर मांग की।

पार्षदों ने सवाल उठाया कि जब नगर निगम ने फेरीवालों की पहचान और जानकारी को डिजिटल करने के लिए खुद क्यूआर कोड जारी किए हैं, तो उन्हीं विक्रेताओं पर भारी जुर्माना क्यों लगाया जा रहा है। बैठक में प्रकाश दरेकर और यशवंत किल्लेदार ने कहा कि मुंबई में लाखों लोग फेरी लगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। पिछले आठ महीनों से बीएमसी और पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, जिसके चलते कई गरीब फेरीवालों के पास बच्चों की स्कूल फीस भरने तक के पैसे नहीं बचे हैं।

पार्षदों ने दादर और अन्य इलाकों में एक ही दिन में तीन-तीन बार जुर्माना वसूलने और गाड़ियां जब्त करने का गंभीर आरोप लगाया। वहीं, अजंता यादव ने सवाल उठाया कि पंजीकृत 99 हजार फेरीवालों में से अब तक केवल 55 हजार को ही क्यूआर कोड दिए गए हैं। उन्होंने पूछा कि बाकी विक्रेताओं को यह सुविधा कब मिलेगी।

दूसरी ओर, बीएमसी आयुक्त ने प्रशासन का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि 'पैडेस्ट्रियन फर्स्ट' अभियान के तहत मुख्य रूप से फुटपाथ, स्कूल, अस्पताल और रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील स्थानों को अतिक्रमण मुक्त कराया जा रहा है। उन्होंने साफ किया कि किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने के बजाय नियमों का उल्लंघन करने वालों पर समान रूप से कार्रवाई की जा रही है।

प्रशासन ने यह भी जानकारी दी कि सितंबर महीने में फेरीवालों का नए सिरे से सर्वेक्षण कराया जाएगा। इसके बाद पार्षदों ने मांग की कि टाउन वेंडिंग कमेटी का गठन जल्द किया जाए और फेरीवालों के लिए निश्चित क्षेत्र तय किए जाएं, ताकि उन्हें राहत मिल सके। बैठक में उठे इन मुद्दों ने क्यूआर कोड धारक फेरीवालों पर कार्रवाई, जुर्माने और उनके लिए निर्धारित क्षेत्रों को लेकर प्रशासन तथा पार्षदों के बीच बने मतभेद को सामने ला दिया।

Tags: