मुंबई में बारिश के मौसम के साथ डेंग्यू और मलेरिया के बढ़ते मामलों ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की स्थायी समिति की बैठक में प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। बैठक में फॉगिंग मशीनों की कमी, कर्मचारियों की किल्लत और निर्माण स्थलों पर जमा पानी में मच्छरों के पनपने को लेकर सदस्यों ने प्रशासन को जमकर घेरा।

सदस्यों ने कहा कि कागजों पर कार्रवाई के बजाय जमीनी स्तर पर फॉगिंग और छिड़काव दिखाई देना चाहिए, क्योंकि लापरवाही का सीधा असर अस्पतालों पर पड़ रहा है और मरीजों का बोझ बढ़ रहा है।

बैठक में गणेश खणकर और अमय घोले ने आरोप लगाया कि स्थिति गंभीर होने के बावजूद फॉगिंग मशीनों की संख्या बेहद कम है और वे संबंधित इलाकों में नजर नहीं आ रही हैं। जमीर कुरेशी ने चिंता जताई कि झुग्गी-झोपड़ियों में बीमारियों का असर अधिक है, लेकिन वहां कर्मचारियों की भारी कमी बनी हुई है।

डॉक्टर सईदा खान ने फॉगिंग व्यवस्था से जुड़ी एक अहम समस्या उठाई। उन्होंने बताया कि फॉगिंग मशीन में इस्तेमाल होने वाला डीजल एक घंटे में ही खत्म हो जाता है। इसके चलते आधे इलाके में ही छिड़काव हो पाता है और पूरा क्षेत्र कवर नहीं हो पाता।

टुलिप मिरांडा ने दावा किया कि उनके क्षेत्र में एक ही परिवार के तीन लोग मलेरिया से पीड़ित हैं। उन्होंने नए निर्माण स्थलों पर मच्छरों की उत्पत्ति तेजी से बढ़ने का मुद्दा भी उठाया।

बैठक के दौरान सदस्य अंजता यादव ने डेंग्यू से एक 12 साल के बच्चे की मौत की दुखद जानकारी दी। इस जानकारी के बाद बैठक का माहौल काफी भावुक हो गया।

मामले पर जवाब देते हुए बीएमसी की अतिरिक्त आयुक्त प्राजक्ता वर्मा लवंगारे ने कहा कि प्रशासन ने समिति के सदस्यों के सुझावों को गंभीरता से लिया है। उन्होंने बताया कि शहर के 4,075 निर्माण स्थलों पर विशेष नजर रखी जा रही है और 20 से 30 हजार कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया है।

प्राजक्ता वर्मा लवंगारे ने आश्वासन दिया कि अगले 15 दिनों में सभी विभागों की विस्तृत रिपोर्ट स्थायी समिति के सामने पेश की जाएगी।

वहीं, स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने कहा कि मानसून के दो महीने बाकी हैं और ऐसे में प्रशासन की यह सुस्ती ठीक नहीं है। बैठक के बाद मामले को अगली बैठक में विस्तृत चर्चा के लिए रख दिया गया। डेंग्यू-मलेरिया के बढ़ते मामलों के बीच अब फॉगिंग व्यवस्था, कर्मचारियों की उपलब्धता और निर्माण स्थलों की निगरानी पर बीएमसी की आगामी कार्रवाई पर समिति की नजर रहेगी।

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