बेस्ट के 22 डिपो के पुनर्विकास प्रस्ताव को बीएमसी महासभा की मंजूरी, विपक्ष के भारी विरोध के बीच पास हुआ प्रस्ताव
बीएमसी महासभा ने विरोध के बीच बेस्ट के 22 डिपो की 140 एकड़ जमीन के पुनर्विकास प्रस्ताव को मंजूरी दी, अब फैसला राज्य सरकार करेगी।
मुंबई की जीवन रेखा मानी जाने वाली ‘बेस्ट’ उपक्रम के 22 बस डिपो की लगभग 140 एकड़ जमीन के पुनर्विकास प्रस्ताव को बीएमसी महासभा ने भारी हंगामे और विपक्ष के विरोध के बीच मंजूरी दे दी। सत्ताधारी गठबंधन ने बहुमत के बल पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत प्रस्ताव पारित कराया। इसके साथ ही महत्वाकांक्षी ‘बेस्ट कायाकल्प परियोजना’ को ‘नवभारत मेगा डेवलपर्स’ के माध्यम से विकसित करने का रास्ता साफ हो गया है। परियोजना के तहत डिपो की जमीनों को दीर्घकालिक लीज पर दिया जाएगा।
महासभा की बैठक में प्रस्ताव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई। विरोधी पक्ष नेता किशोरी पेडणेकर और शिवसेना नगरसेवक यशोधर फणसे ने प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए इसे रद्द करने की मांग की। विपक्ष ने तर्क दिया कि बेस्ट की कीमती जमीनों को निजी हाथों में देने से मुंबईकरों का नुकसान होगा।
कांग्रेस के नगरसेवक अशरफ आजमी ने भी प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने अब तक दी गई जमीनों पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। कुछ पार्षदों ने सुझाव दिया कि बेस्ट डिपो को बेचने के बजाय इस उपक्रम का पूरी तरह बीएमसी में विलय किया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, भाजपा और सत्ताधारी पक्ष के नेताओं ने प्रस्ताव का पुरजोर समर्थन किया। उनका कहना था कि बेस्ट की वित्तीय स्थिति सुधारने और डिपो के आधुनिकीकरण के लिए फंड जुटाना बेहद जरूरी है। पीपीपी मॉडल के तहत पहले चरण में बस डिपो और कर्मचारी कॉलोनियों का नवीनीकरण किया जाएगा। इसके साथ ही पार्किंग सुविधा और बुनियादी ढांचे का निर्माण भी किया जाएगा।
देर रात तक चली लंबी चर्चा के बाद बीएमसी महासभा ने प्रस्ताव को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी। अब इसे अंतिम निर्णय के लिए राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। इस मंजूरी के साथ बेस्ट के 22 डिपो की लगभग 140 एकड़ जमीन के पुनर्विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।