मुंबई में आवारा कुत्तों का आतंक: एक साल में 1.54 लाख लोगों को काटा, बीएमसी में उठा मुद्दा
मुंबई में 2025 में आवारा कुत्तों के काटने के 1.54 लाख मामले दर्ज हुए। बीएमसी महासभा में टीकों, नसबंदी और शेल्टर होम का मुद्दा उठा।
मुंबई में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा बीएमसी महासभा में जोरदार तरीके से उठा। बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त अविनाश ढाकणे द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में मुंबई में आवारा कुत्तों के काटने के कुल 1,54,017 मामले दर्ज किए गए।
शिवसेना नगरसेवक कैलाशनाथ पाठक ने धारा 66 (बी) के तहत यह गंभीर विषय उठाते हुए कहा कि शहर की सड़कों, फुटपाथों, उद्यानों, स्कूलों और अस्पतालों के आसपास आवारा कुत्तों का जमावड़ा बना रहता है। इससे नागरिकों पर हमले लगातार बढ़ रहे हैं।
महासभा में विरोधी पक्ष नेता किशोरी पेडणेकर, पूर्व महापौर श्रद्धा जाधव, सचिन पड़वल, गणेश खणकर और डॉ. सईदा खान समेत विभिन्न दलों के नगरसेवकों ने बीएमसी अस्पतालों में रेबीज रोधी टीकों की कमी और नसबंदी अभियानों की धीमी गति पर सवाल उठाए।
चर्चा के बाद महापौर रितू तावड़े ने बीएमसी प्रशासन को आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए तुरंत ठोस उपाय योजना लागू करने के निर्देश दिए।
प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया कि ह्यूमन सोसाइटी इंटरनेशनल के 2024 के सर्वे के मुताबिक मुंबई में लगभग 90,700 आवारा कुत्ते हैं। अप्रैल 2024 से अब तक हजारों कुत्तों की नसबंदी और रेबीज टीकाकरण किया जा चुका है।
प्रशासन के अनुसार, राष्ट्रीय कार्ययोजना के तहत 2030 तक मुंबई को रेबीज मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के तहत मालवणी, मुलुंड, आणिक, ऐरोली और मुंबई पोर्ट ट्रस्ट की जगहों पर कुत्तों के लिए छह नए शेल्टर होम बनाने की योजना है। इन शेल्टर होम के लिए भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया जारी है।
मुंबई में एक वर्ष के दौरान आवारा कुत्तों के काटने के 1,54,017 मामले सामने आने के बाद बीएमसी महासभा में नागरिक सुरक्षा, रेबीज रोधी टीकों की उपलब्धता, नसबंदी अभियान और नए शेल्टर होम की योजना पर प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग सामने आई है।