महालक्ष्मी में 702 करोड़ के सबवे प्रस्ताव पर स्थायी समिति में हंगामा, काम शुरू होने के बाद मंजूरी पर उठे सवाल
महालक्ष्मी में नेहरू विज्ञान केंद्र मेट्रो स्टेशन से वर्ली तक 1.5 किलोमीटर लंबे सबवे के 702.44 करोड़ रुपये के प्रस्ताव पर बीएमसी स्थायी समिति में हंगामा हुआ। काम शुरू होने के बाद मंजूरी मांगने पर विपक्ष ने सवाल उठाए।
मुंबई। मुंबई महानगरपालिका की स्थायी समिति की गुरुवार को हुई बैठक में महालक्ष्मी क्षेत्र में प्रस्तावित सबवे को लेकर जमकर हंगामा हुआ। नेहरू विज्ञान केंद्र मेट्रो स्टेशन से वर्ली के बीच बनने वाले 1.5 किलोमीटर लंबे सबवे के लिए 702.44 करोड़ रुपये का फंड देने के प्रस्ताव पर विपक्ष ने बीएमसी प्रशासन को घेरा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने नियमों को दरकिनार करते हुए परियोजना का काम पहले ही शुरू कर दिया और अब करोड़ों रुपये के फंड के लिए मंजूरी मांग रहा है।
विरोध के बावजूद सत्ताधारी दल ने बहुमत के आधार पर इस विवादित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। बैठक में कांग्रेस नेता अशरफ आजमी और एमआईएम के जमीर कुरेशी ने बीएमसी की ओर से पूरा फंड दिए जाने के बावजूद मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को 5 प्रतिशत प्रशासनिक शुल्क और अलग से सलाहकार शुल्क दिए जाने के औचित्य पर सवाल उठाए।
ट्यूलिप मिरांडा ने कहा कि एक ओर उपनगरों में बुनियादी सुविधाएं बदहाल हैं, वहीं दूसरी ओर इस तरह की परियोजनाओं पर भारी रकम खर्च की जा रही है। शिवसेना (ठाकरे गुट) के सदस्यों यशोधन फणसे और श्रद्धा जाधव ने भी इस मार्ग से मिलने वाली नागरिक सुविधाओं की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने की मांग की।
वहीं भाजपा के मकरंद नार्वेकर और प्रकाश दरेकर ने परियोजना का जोरदार बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह सबवे कोस्टल रोड और मेट्रो-3 को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, जो आम पैदल यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।
स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने कहा कि सरकारी एजेंसी द्वारा काम कराए जाने के कारण कुछ लोगों को आपत्ति है, लेकिन मुंबईकरों के हित को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
हालांकि, परियोजना का काम शुरू होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर मंजूरी लेने की प्रक्रिया को लेकर बीएमसी के गलियारों में नाराजगी बनी हुई है। 702.44 करोड़ रुपये के इस प्रस्ताव ने परियोजना की उपयोगिता के साथ-साथ मंजूरी की प्रक्रिया और अतिरिक्त शुल्कों को लेकर भी स्थायी समिति की बैठक में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।