मुंबई मनपा की एफडी में 14 हजार करोड़ की गिरावट, पानी के संकट पर भी बढ़ी चिंता
नेता अशरफ आजमी ने बीएमसी की घटती एफडी और जल संकट पर श्वेतपत्र की मांग की है।
मुंबई महानगरपालिका की आर्थिक स्थिति और शहर में गहराते जल संकट को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। पिछले तीन साल से प्रशासक के अधीन चल रही बीएमसी के कामकाज पर सवाल उठाते हुए नेता अशरफ आजमी ने वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता की मांग की है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि साल 2021-22 में मुंबई महानगरपालिका के फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में 91 हजार 690 करोड़ रुपये जमा थे, जो अब घटकर 77 हजार 905 करोड़ रुपये रह गए हैं। इस तरह एफडी में लगभग 14 हजार करोड़ रुपये की गिरावट आई है।
अशरफ आजमी ने कहा कि देश, राज्य और महानगरपालिका में बीजेपी और शिवसेना की सरकार होने के बावजूद बीएमसी की वित्तीय स्थिति लगातार बिगड़ रही है। उन्होंने बताया कि फरवरी 2025 से लेकर अब तक के छह महीनों में ही करीब 3 हजार 544 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। उनके अनुसार, लगातार घटती एफडी और बढ़ते खर्च महानगरपालिका के आर्थिक प्रबंधन पर सवाल खड़े करते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासकीय शासन के दौरान ऊंचे दामों पर ठेके और काम दिए जाने से बीएमसी पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा है। आजमी ने बताया कि महानगरपालिका के पास उपलब्ध 77 हजार करोड़ रुपये में से केवल 51 प्रतिशत राशि ही विकास कार्यों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च की जा सकती है। शेष 49 प्रतिशत राशि यानी लगभग 40 हजार करोड़ रुपये पेंशन, ग्रेच्युटी और ठेकेदारों की अमानत राशि के रूप में सुरक्षित रखनी पड़ती है। ऐसे में विकास कार्यों के लिए उपलब्ध धनराशि को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
महानगरपालिका के वित्तीय व्यवहार में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अशरफ आजमी ने प्रशासन से श्वेतपत्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पिछले चार सालों में दिए गए ठेकों, उनकी ऊंची दरों और उनकी उपयोगिता का पूरा हिसाब जनता के सामने रखा जाना चाहिए। इससे महानगरपालिका के खर्च और विकास कार्यों पर होने वाले व्यय की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
वित्तीय स्थिति के साथ ही आजमी ने मुंबई में गहराते जल संकट को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मुंबई को पानी उपलब्ध कराने वाले सात मुख्य तालाबों में इस समय पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है। राज्य के बड़े हिस्से में सूखा घोषित होने के कारण इस बार 31 मई के बाद भातसा बांध से अतिरिक्त पानी मिलना बेहद मुश्किल होगा। ऐसे में आने वाले समय में मुंबई में पानी की किल्लत बढ़ने की आशंका को देखते हुए महानगरपालिका को तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।
आजमी ने प्रशासन से पानी की चोरी और लीकेज के मामलों में कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जल आपूर्ति से जुड़ी इन समस्याओं पर अभी से प्रभावी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में मुंबईकरों को पानी के संकट का सामना न करना पड़े। बीएमसी की एफडी में आई भारी गिरावट, ठेकों की दरों पर उठे सवाल और जल भंडारों में पानी की उपलब्धता को लेकर जताई गई चिंता ने महानगरपालिका के वित्तीय प्रबंधन, विकास कार्यों और जल आपूर्ति व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को केंद्र में ला दिया है।